Digital Census 2026-27
बिजनौर में शुरू हुई हाई-टेक जनगणना की तैयारी, मोबाइल ऐप से होगा घर-घर डेटा कलेक्शन

बिजनौर में डिजिटल जनगणना की उलटी गिनती शुरू
बिजनौर में डिजिटल जनगणना 2026-27 के सफल संचालन की तैयारियां तेज हो गई हैं। भारत सरकार के निर्देशों और जिलाधिकारी जसजीत कौर के निर्देशन में मंगलवार को वर्धमान डिग्री कॉलेज में जनगणना के दूसरे चरण के तहत फील्ड ट्रेनर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन जिला जनगणना अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वान्या सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में फील्ड ट्रेनर्स को डिजिटल जनगणना की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
डिजिटल तकनीक से होगी देश की सबसे बड़ी डेटा कवायद
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों ने बताया कि इस बार होने वाली जनगणना पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी।
- डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया जाएगा
- घर-घर जाकर रियल-टाइम डेटा एंट्री की जाएगी
- डेटा तुरंत सर्वर पर सिंक और सत्यापित होगा
यह व्यवस्था जनगणना को तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने में मदद करेगी।
33 महत्वपूर्ण सवालों के जरिए तैयार होगा सामाजिक-आर्थिक डेटा
प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर्स ने फील्ड ट्रेनर्स को जनगणना के पहले चरण में पूछे जाने वाले 33 प्रमुख प्रश्नों की जानकारी दी।
इन प्रश्नों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- मकान की स्थिति
- पानी, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं
- आवासीय संरचना और संपत्ति की जानकारी
इस डेटा के आधार पर सरकार आवास, शहरी विकास, सामाजिक योजनाओं और संसाधन वितरण की नीतियां तय करती है।
नागरिकों को मिलेगा ‘Self-Enumeration’ का विकल्प
जनगणना प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए नागरिकों को 15 दिन की ‘स्व-गणना विंडो’ भी उपलब्ध कराई जाएगी।
इस दौरान लोग स्वयं पोर्टल या ऐप के माध्यम से अपना डेटा दर्ज कर सकेंगे। बाद में फील्ड अधिकारी इसका सत्यापन करेंगे।
मार्च में पूरी होगी ट्रेनिंग, मई से शुरू होगा फील्ड सर्वे
जिला जनगणना अधिकारी वान्या सिंह ने बताया कि:
- मार्च 2026 तक फील्ड ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूरा कर लिया जाएगा
- इसके बाद वही ट्रेनर्स गणक और सुपरवाइजर को प्रशिक्षण देंगे
- मई 2026 से मकान सूचीकरण और मकान गणना का फील्ड कार्य शुरू होगा
प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह प्रशिक्षित होकर जनगणना का कार्य बिना किसी त्रुटि के पूरा करें।
कार्यक्रम में मौजूद रहे ये अधिकारी
इस अवसर पर कई अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- जिला प्रभारी जनगणना अधिकारी जे.पी. यादव
- प्रभारी अधिकारी जनगणना नितिन कुमार
- मास्टर ट्रेनर डॉ. आकाश अग्रवाल
- डॉ. अमित कुमार
- डॉ. राजीव बिश्नोई
- अन्य प्रशासनिक अधिकारी और प्रशिक्षणार्थी
क्यों महत्वपूर्ण है डिजिटल जनगणना
विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल जनगणना से कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:
- डेटा संग्रह की गति और सटीकता बढ़ेगी
- कागजी प्रक्रिया खत्म होने से खर्च कम होगा
- योजनाओं के लिए रियल-टाइम डेटा उपलब्ध होगा
- नीति निर्माण अधिक डेटा-ड्रिवन बनेगा
निष्कर्ष
बिजनौर में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में सरकारी योजनाओं और विकास नीतियों के लिए डेटा आधारित शासन (Data Driven Governance) को नई गति मिल सकती है।
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