Target Tv Live

रासायनिक कारखानों से तबाही: गजरौला में किसान आंदोलन तेज, कार्रवाई की मांग

रासायनिक कारखानों से तबाही: गजरौला में किसान आंदोलन तेज, कार्रवाई की मांग

अमरोहा | 8 फरवरी 2026। रिपोर्ट : अवनीश त्यागी 

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद का गजरौला औद्योगिक क्षेत्र अब विकास का नहीं, बल्कि ज़हर, बीमारी और बर्बादी का पर्याय बनता जा रहा है। रासायनिक कारखानों से फैलते जानलेवा प्रदूषण के खिलाफ 50 दिनों से शांतिपूर्वक धरने पर बैठे किसानों का सब्र रविवार को टूट गया। शहबाजपुर डोर–नाईपुरा इलाके में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया, जब जुबिलेंट इन्ग्रेविया समेत तमाम केमिकल फैक्ट्रियों के पुतले फूंके गए और जिला प्रशासन के खिलाफ़ जमकर नारेबाज़ी हुई।

ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर सैकड़ों किसान, महिलाएं और बच्चे धरना स्थल पर पहुंचे। चारों ओर गूंजते नारे, जलते पुतले और आक्रोशित चेहरों ने यह साफ कर दिया कि अब यह आंदोलन केवल स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि किसान बनाम विनाशकारी विकास मॉडल की निर्णायक लड़ाई बन चुका है।

ज़हर बन चुका पानी, सांस लेना भी हुआ मुश्किल

किसानों का आरोप है कि नाईपुरा, शहबाजपुर डोर और आसपास के गांवों में स्थित रासायनिक कारखानों के जहरीले अपशिष्टों ने

  • भूजल को पूरी तरह दूषित,
  • सुजमना ढाब झील से निकलने वाली बगद नदी को मृत,
  • और तालाबों व जलस्रोतों को केमिकल डंपिंग ज़ोन में बदल दिया है।

हैंडपंप और ट्यूबवेल से निकलने वाला पानी पीला, बदबूदार और केमिकल युक्त है। किसानों का दावा है कि इसी जहरीले पानी के कारण इलाके में कैंसर, त्वचा रोग, सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। खेतों में सिंचाई करने पर फसलें सूख रही हैं, पशुधन बीमार पड़ रहा है और ग्रामीणों का जीवन संकट में है।

रोज़गार नहीं, सिर्फ़ बीमारी दे रहे कारखाने

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि जिन कारखानों को विकास और रोजगार का जरिया बताया गया था, उन्होंने

  • स्थानीय युवाओं को नौकरी नहीं दी,
  • लेकिन गांवों को बीमारियों और गरीबी का स्थायी केंद्र बना दिया।

उनका कहना है कि जल–जंगल–जमीन पर समाज का अधिकार खत्म होते ही विनाश शुरू हो गया। यह विकास नहीं, बल्कि सुनियोजित पर्यावरणीय अपराध है।

50 दिन से अनसुनी आवाज़, सत्ता पर तीखा प्रहार

भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू, प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, मंडलाध्यक्ष एहसान अली, कांग्रेस नेता आसिम बिल्डर और शकील चौधरी ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पलायन रोकने के लिए पर्यावरण बचाने की बात करते हैं, तो प्रदूषण से उजड़ते किसानों की सुध क्यों नहीं ली जा रही?

किसान नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा—

“सत्ता के शिखर पर बैठने के बाद या तो सम्मान से नीचे आना पड़ता है, या फिर लुढ़कने की तैयारी करनी पड़ती है।”

दिल्ली या वाशिंगटन? नीतियों पर सीधा सवाल

नेताओं ने अमेरिका ट्रेड डील को किसानों के लिए विनाशकारी बताते हुए कहा कि आयात नीतियां देश के किसानों को तबाह कर रही हैं। उन्होंने तीखा सवाल उछाला—

“देश का नेतृत्व दिल्ली से होता है या वाशिंगटन से?”

किसानों का आरोप है कि नीतियां किसानों के पक्ष में नहीं, बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बड़े उद्योगों के हित में बनाई जा रही हैं।

मांगें साफ़, आंदोलन बेमियादी

किसानों ने ऐलान किया कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, धरना खत्म नहीं होगा। प्रमुख मांगें हैं—

  • प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई
  • जल–जंगल–जमीन का संवैधानिक संरक्षण
  • एमएसपी को कानूनी गारंटी
  • किसान हितैषी आयात नीति
  • प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य जांच और शुद्ध पेयजल व्यवस्था

जनआंदोलन में तब्दील हुआ संघर्ष

इस आंदोलन में ज़ाकिर, शकील अहमद, चंद्रपाल सिंह, सोमपाल सिंह, सुरेश सिंह, ओमप्रकाश सिंह, होमपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह, प्रदीप कुमार, रोशन लाल, इस्लाम, समरपाल सिंह, रामशरण, मनोहर लाल, रघुवीर सिंह, मनदीप सिंह, सुधीर प्रधान, हेमंत कुमार, मंसूर अली, आसिफ हुसैन, जुबेर चौधरी, जुल्फिकार चौधरी, अशरफ चौधरी, कर्म चौधरी, दिनेश सैनी, बाबूराम, अशोक सिंह, रामप्रसाद सिंह समेत सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी ने इसे जनआंदोलन बना दिया।

विकास बनाम जीवन

गजरौला की तस्वीर बताती है कि अगर उद्योगों पर लगाम नहीं लगी, तो विकास और विनाश के बीच की रेखा पूरी तरह मिट जाएगी। यह आंदोलन केवल एक इलाके की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लिए चेतावनी है कि पर्यावरण की कीमत पर किया गया विकास अंततः समाज को तबाह करता है

गजरौला प्रदूषण संकट: 50 दिन बाद उग्र किसान आंदोलन, केमिकल फैक्ट्रियों के पुतले जले

अमरोहा के गजरौला में रासायनिक कारखानों से फैलते प्रदूषण के खिलाफ किसानों का 50 दिनों से जारी आंदोलन उग्र हो गया। किसानों ने फैक्ट्रियों के पुतले फूंके और ठोस कार्रवाई की मांग की

#TargetTvLive                                          #गजरौला_प्रदूषण
#किसान_आंदोलन
#जुबिलेंट_इन्ग्रेविया
#केमिकल_फैक्ट्री
#जल_जंगल_जमीन
#पर्यावरण_बचाओ
#अमरोहा_न्यूज़
#UP_News
#MSP_कानून
#IndustrialPollution

Leave a Comment

यह भी पढ़ें