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मतदाता सूची पर अफवाह फैलाने वालों की अब खैर नहीं! चुनाव आयोग सख़्त

मतदाता सूची पर अफवाह फैलाने वालों की अब खैर नहीं! चुनाव आयोग सख़्त, दुर्व्यवहार करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

बिजनौर | 07 फरवरी 2026

भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को लेकर फैल रही झूठी अफवाहों और सरकारी कार्मिकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर सख़्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एसआईआर (Special Intensive Revision) कार्य में लगे ईआरओ, एईआरओ, बीएलओ और अन्य कर्मचारियों को डराने-धमकाने, गुमराह करने या उनके कार्य में बाधा डालने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी जसजीत कौर ने प्रेस को जानकारी देते हुए कहा कि कुछ असामाजिक तत्व फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर निराधार संदेह और अफवाहें फैला रहे हैं, जो पूरी तरह बेबुनियाद और भ्रामक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित, पारदर्शी और कानूनी है, जिसमें किसी भी तरह की मनमानी की कोई गुंजाइश नहीं है।

फॉर्म-7 को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें निराधार

जिलाधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के पास मतदाता का नाम हटाने की स्पष्ट प्रक्रिया है, जो उचित सुनवाई और जांच के बाद ही पूरी होती है।
फॉर्म-7 केवल निम्न परिस्थितियों में स्वीकार किया जाता है—

  • मतदाता की मृत्यु
  • स्थायी रूप से स्थानांतरण
  • एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होना
  • भारतीय नागरिक न होना

उन्होंने बताया कि फॉर्म-7 का दैनिक डेटा आयोग के निर्धारित पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाता है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर निगरानी बनी रहती है।

आपत्ति की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी

यदि किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज की जाती है तो—

  • संबंधित बीएलओ पहले फॉर्म को पोर्टल पर डिजिटाइज करेगा
  • इसके बाद इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) द्वारा
    • आपत्तिकर्ता
    • और संबंधित मतदाता
      दोनों को लिखित नोटिस जारी किया जाएगा
  • मौका मुआयना और साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा

जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-7 भरने का अधिकार केवल उसी व्यक्ति को है, जिसका नाम उसी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हो और उसे अपना नाम व मतदाता पहचान पत्र संख्या देना अनिवार्य है।

राजनीतिक दलों को नियमित रूप से दी जाती है जानकारी

प्रशासन की पारदर्शिता को रेखांकित करते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि—

  • प्रपत्र 6, 6ए, 7 और 8 से संबंधित आंकड़े
  • प्रत्येक सप्ताह सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठकों में साझा किए जाते हैं
  • साथ ही इनकी प्रतिदिन की सूची जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाती है

सरकारी कार्य में बाधा बर्दाश्त नहीं

जिलाधिकारी जसजीत कौर ने सख़्त शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि—

“मतदान केंद्रों या कार्यालयों में जाकर सरकारी कार्य में बाधा डालना,
अभिलेखों को नष्ट करना,
बीएलओ, वीआरसी ऑपरेटर, अभिकर्ताओं व अधिकारियों को डराना-धमकाना
या उनका उत्पीड़न करना—
किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने दोहराया कि जिला प्रशासन निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप एसआईआर प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ है। इसे लेकर भ्रम फैलाने और सरकारी कर्मियों को निशाना बनाने वालों पर अब चुनाव आयोग और जिला प्रशासन की सीधी नजर है। अफवाहों की राजनीति करने वालों के लिए यह स्पष्ट संदेश है—
कानून से ऊपर कोई नहीं।

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