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मंडलायुक्त के आदेश धरे रह गए — अफजलगढ़ बीडीओ और अकाउंटेंट अब भी कुर्सी पर!

  Operation Vikas Bhavan first installment

अफजलगढ़ मनरेगा घोटाले में प्रशासनिक हेराफेरी का खेल!

बीडीओ अटैचमेंट के बाद भी ब्लॉक आवास में डटे — सबूतों से छेड़छाड़ जारी!
सीडीओ बोले – “अकाउंटेंट कम हैं, इसलिए नहीं हटाया”… सवाल – क्या बचाए जा रहे हैं दोषी अफसर?

खबर का सार:

 बीडीओ बिजनौर अटैचमेंट के बाद भी अफजलगढ़ ब्लॉक आवास में ही रह रहे हैं।
 साक्ष्यों से छेड़छाड़ जारी, अकाउंटेंट साथ में सक्रिय।
 सीडीओ बोलें— “अकाउंटेंट कम हैं”, पर विशेषज्ञ बोले — “बचाव की कोशिश साफ दिखती है।”
 शासन को भेजी रिपोर्ट, पर कार्रवाई अब तक नहीं!

 

📍 बिजनौर | विशेष संवाददाता रिपोर्ट | 11 अक्टूबर 2025

🔹 मनरेगा घोटाले की जांच में नया मोड़ — आदेशों की धज्जियाँ उड़ीं

जनपद बिजनौर के अफजलगढ़ ब्लॉक में मनरेगा के करोड़ों के घोटाले का मामला अब प्रशासनिक मिलीभगत की तरफ इशारा कर रहा है।
मंडलायुक्त द्वारा बीडीओ और अकाउंटेंट को हटाने के आदेश दिए जाने के बावजूद,
न आदेशों का पालन हुआ, न घोटाले की जड़ पर प्रहार।

बीडीओ का अटैचमेंट हुआ बिजनौर, लेकिन “हाजिरी” अफजलगढ़ में!

सूत्रों के अनुसार, मंडलायुक्त के आदेश पर बीडीओ को बिजनौर विकास भवन से अटैच किया गया था,
लेकिन बीडीओ न तो बिजनौर कार्यालय पहुंचे, न ही अपना ब्लॉक आवास खाली किया।

वह अब भी ब्लॉक परिसर स्थित सरकारी आवास में ही रह रहे हैं
और सूत्रों का दावा है कि वे रिकॉर्ड और साक्ष्यों में छेड़छाड़ करने में लगे हैं।
इस दौरान अकाउंटेंट भी उनके साथ सक्रिय बताया जा रहा है।

सीडीओ की सफाई — “अकाउंटेंट कम हैं”

जब इस पर सवाल उठाया गया कि आदेशों के बावजूद
अकाउंटेंट को क्यों नहीं हटाया गया,
तो सीडीओ पूर्णा बोरा का जवाब चौंकाने वाला था —

“जनपद में अकाउंटेंट की कमी है, उसे हटाने से कार्य प्रभावित होगा।”

यह बयान अब प्रशासनिक गलियारों में बहस का विषय बन गया है।

क्या सीडीओ किसी को बचा रहे हैं?

प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि
अकाउंटेंट की कमी का तर्क सिर्फ बहाना है।
यदि सीडीओ चाहें तो
👉 “दूसरे ब्लॉक से किसी अकाउंटेंट की तैनाती यहां कर सकती हैं,”
और आरोपी को स्थानांतरित किया जा सकता है।

“सीडीओ को यह ज्ञान नहीं है या जानबूझकर अनदेखी कर रही हैं —
दोनों ही स्थिति प्रशासनिक गंभीरता दर्शाती हैं।”
— वरिष्ठ अधिकारी (नाम न बताने की शर्त पर)

घोटाले का ब्योरा—आंकड़े बोल रहे हैं

वित्तीय वर्ष खर्च राशि (₹ लाख)
2022-23 8.19
2023-24 14.19
2024-25 511.44
2025-26 29.88
कुल योग 563.70

सिर्फ एक वर्ष में 500 लाख से अधिक का भुगतान,
वह भी बिना ठोस दस्तावेजों और फील्ड सत्यापन के —
इससे बड़ा सवाल और क्या हो सकता है?

आदेश जारी, पर अनुपालन शून्य

  • मंडलायुक्त ने बीडीओ और अकाउंटेंट को हटाने के आदेश दिए।
  • बीडीओ को बिजनौर विकास भवन से अटैच किया गया।
  • लेकिन बीडीओ ने आवास नहीं छोड़ा, कार्यालय नहीं ज्वॉइन किया
  • दोनों अधिकारी अब भी अफजलगढ़ ब्लॉक में रिकॉर्ड बदलने में सक्रिय
  • सीडीओ ने इस पर भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की

शासन को लिखा पत्र, लेकिन कार्रवाई ठप

सीडीओ पूर्णा बोरा का कहना है कि
उन्होंने शासन को पूरे प्रकरण की जानकारी भेज दी है
और अब कार्यवाही शासन स्तर पर होनी बाकी है
लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब तक शासन कार्रवाई करे,
क्या तब तक सबूत मिटा दिए जाएंगे?

जनता और कर्मचारियों में गुस्सा

अफजलगढ़ क्षेत्र में स्थानीय लोगों और ग्राम रोजगार सेवकों में भारी आक्रोश है।
लोगों का कहना है कि —

“जब तक दोषी अधिकारी वहीं डटे रहेंगे,
तब तक जांच महज एक दिखावा बनी रहेगी।”

विशेषज्ञों की राय

“बीडीओ का अटैचमेंट केवल कागजों में हुआ है।
असल में वह अब भी वहीं रहकर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं।
यदि तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरा रिकॉर्ड बदल जाएगा।”
— प्रशासनिक विश्लेषक, मेरठ

अब उठ रहे हैं तीखे सवाल

  1. बीडीओ अटैचमेंट के बाद भी अफजलगढ़ में क्यों डटे हैं?
  2. सीडीओ ने आवास खाली कराने की कार्रवाई क्यों नहीं की?
  3. “अकाउंटेंट की कमी” का तर्क — क्या यह सिर्फ बहाना है?
  4. क्या शासन तक पहुंचने से पहले सबूतों को मिटाया जा रहा है?
  5. आखिर मंडलायुक्त के आदेशों को ठंडे बस्ते में किसके कहने पर डाला गया?

निष्कर्ष

अफजलगढ़ ब्लॉक का मनरेगा घोटाला अब केवल वित्तीय अनियमितता नहीं रहा —
यह प्रशासनिक बेईमानी, मिलीभगत और आदेश अवहेलना का उदाहरण बन चुका है।
जहाँ शासन की मंशा स्पष्ट है, वहीं कुछ अफसरों की ढाल और दरबारी नीति
इस पूरे सिस्टम पर सवाल उठा रही है।

 

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