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गंगा एक्शन प्लान: बिजनौर से होगी पर्यावरण क्रांति की शुरुआत, चार जिलों में होगी नई कार्ययोजना लागू

गंगा एक्शन प्लान: बिजनौर से होगी पर्यावरण क्रांति की शुरुआत, चार जिलों में होगी नई कार्ययोजना लागू

  • डीएम की अध्यक्षता और डीएफओ के संयोजन से बना खाका
  • पाँच बिंदुओं पर केंद्रित होगा पूरा अभियान, बिजनौर बनेगा रोल मॉडल

 हाइलाइटर

  • गंगा एक्शन प्लान का आगाज़ बिजनौर से, अमरोहा, संभल और रामपुर में प्रक्रिया जारी
  • योजना की बागडोर डीएम के हाथों में, समन्वयन डीएफओ करेंगे
  • एसीएफ,डीपीओ ने साझा की प्रमुख रूपरेखा ,जनता की भागीदारी होगी अहम
  • पाँच बिंदुओं पर विशेष फोकस: शवदाह गृह, भूजल, जैविक खेती, अतिक्रमण हटाना, वेटलैंड संरक्षण

 विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश सरकार ने गंगा संरक्षण के प्रयासों को नई गति देने के लिए गंगा एक्शन प्लान तैयार किया है।
राज्य के चार जनपदों , बिजनौर, अमरोहा, संभल और रामपुर  को इस योजना के लिए चुना गया है। इनमें से बिजनौर जिले का एक्शन प्लान बनकर पूरी तरह तैयार है, जिसे एक मॉडल प्लान मानकर अन्य जिलों में लागू किया जाएगा।

 प्रशासनिक ढांचा

योजना की अध्यक्षता DM जसजीत कौर कर रही हैं, जबकि वन विभाग DFO अभिनवराज, इसका संयोजन संभाल रहे हैं। ACF ज्ञान सिंह, जिला परियोजना अधिकारी पुलकित के अनुसार, योजना का खाका तैयार कर लिया गया है और चरणबद्ध तरीके से अमल की प्रक्रिया शुरू होगी।

 पाँच प्रमुख फोकस बिंदु

1️⃣ विद्युत शवदाह गृह का निर्माण
👉 गंगा किनारे पर लकड़ी आधारित परंपरागत चिताओं से होने वाले वायु व जल प्रदूषण को रोकने के लिए आधुनिक विद्युत शवदाह गृह स्थापित किए जाएंगे। यह न केवल पर्यावरण हितैषी होगा बल्कि स्थानीय समाज के लिए आधुनिक सुविधा भी प्रदान करेगा।

2️⃣ भूजल स्तर सुधार के उपाय
👉 तेजी से गिरते भूजल स्तर को संतुलित करने के लिए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, चेक डैम और वॉटर रिचार्ज स्ट्रक्चर विकसित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण व शहरी दोनों इलाकों में पेयजल संकट से राहत मिलेगी।

3️⃣ जैविक खेती को बढ़ावा
👉 किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बजाय प्राकृतिक खाद और जैविक तरीकों से खेती करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे न केवल गंगा प्रदूषण घटेगा बल्कि किसानों की लागत कम और उपज की गुणवत्ता बेहतर होगी।

4️⃣ जल निकायों से अतिक्रमण हटाना
👉 नदियों, तालाबों और नालों पर हो रहे अवैध कब्जे हटाकर उन्हें मूल स्वरूप में बहाल किया जाएगा। इससे वर्षा जल संचयन और गंगा में स्वच्छ प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा।

5️⃣ वेटलैंड संरक्षण व जल संरक्षण
👉 गंगा किनारे के प्राकृतिक वेटलैंड्स को संरक्षित कर स्थानीय पक्षियों, मछलियों और जैव विविधता की रक्षा की जाएगी। यह गंगा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

 विशेष विश्लेषण

  • बिजनौर का मॉडल:
    बिजनौर जिले में तैयार गंगा एक्शन प्लान को रोल मॉडल माना जा रहा है। यहाँ के अनुभव और परिणाम अन्य जिलों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।
  • पर्यावरणीय लाभ:
    योजना लागू होने से गंगा नदी में प्रदूषण घटेगा, भूजल स्तर सुधरेगा, खेती टिकाऊ बनेगी और स्थानीय जैव विविधता सुरक्षित होगी।
  • सामाजिक सरोकार:
    गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि आस्था, संस्कृति और जीवन का प्रतीक है। इस योजना से न केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा बल्कि समाज की धार्मिक भावनाओं को भी नया सम्मान मिलेगा।
  • स्थानीय भागीदारी:
    विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना तभी सफल होगी जब आम जनता, ग्राम पंचायतें और किसान इसकी धुरी बनें। प्रशासनिक योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए लोगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

गंगा एक्शन प्लान, उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है। बिजनौर से शुरुआत होने के बाद उम्मीद है कि अमरोहा, संभल और रामपुर में भी जल्द ही यह कार्ययोजना जमीन पर दिखेगी।
यह पहल केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जल संरक्षण, जैव विविधता, सतत कृषि और पर्यावरणीय पुनर्स्थापना की दिशा में एक समग्र प्रयास है।

गंगा तट के जिलों में यह योजना न केवल विकास का आधार बनेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ गंगा और सुरक्षित जल स्रोत भी सुनिश्चित करेगी।

 

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