बिजनौर न्यूज़ स्पेशल रिपोर्ट
निर्माणाधीन जिला अस्पताल में अनियमितताएं उजागर। राज्य मंत्री का औचक निरीक्षण, गुणवत्ता पर उठाए सवाल
मुख्य बिंदु (हाइलाइट्स):
✅ स्थान: निर्माणाधीन जिला अस्पताल, बिजनौर
✅ अवसर: राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल का निरीक्षण दौरा
✅ समय: दोपहर 12:00 बजे
✅ मुद्दा: निर्माण कार्य में एक साल की देरी और घटिया गुणवत्ता
✅ प्रमुख निर्देश: दोषियों पर कड़ी कार्यवाही, सामग्री की जांच, फायर सिस्टम की समीक्षा
निरीक्षण में सामने आई बड़ी खामियां:
🔸 निर्माण कार्य में देरी:
निर्माण एक वर्ष देरी से चल रहा है, तय समय-सीमा का उल्लंघन।🔸 टूटे-फूटे टाइल्स:
फर्श पर लगी टाइल्स टूटी हुई पाई गईं, कई स्थानों पर क्लॉथिंग टाइल्स खुले हुए।🔸 घटिया सामग्री का इस्तेमाल:
- पंजीकरण काउंटर में घटिया क्वालिटी की सामग्री।
- पुरानी लकड़ी का उपयोग प्रकाश में आया।
- लेक्चर रूम की फ्लोरिंग भी मानक के अनुरूप नहीं।
- ओपीडी कक्ष में एलईडी बल्ब व पंखों की गुणवत्ता पर सवाल।
🔸 विद्युत उपकरणों की स्थिति:
वेटिंग लाउंज में लो वोल्टेज बल्ब लगे हुए मिले।
मंत्री का सख्त रुख:
“जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि संपूर्ण निर्माण की गुणवत्तापरक जांच कराई जाए। जो भी दोषी हो, उस पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित हो,” — कपिल देव अग्रवाल
👉 निर्देश में यह भी शामिल:
- सभी फिनिशिंग सामग्री की तकनीकी स्तर पर जांच।
- पूरे भवन के फायर कंट्रोल सिस्टम की अनिवार्य समीक्षा।
विश्लेषण | सवाल उठते हैं:
क्या सरकारी अस्पतालों के निर्माण में गुणवत्ता की बजाय सिर्फ फॉर्मेलिटी रह गई है?
क्या बजट की राशि का दुरुपयोग हो रहा है?
जिला प्रशासन कितनी तत्परता से दोषियों को चिह्नित करेगा?
जमीनी हकीकत vs सरकारी फाइलें:
जहां सरकारी कागज़ों में निर्माण ‘प्रगति पर’ है, वहीं जमीनी स्थिति अनियमितता और लापरवाही का आईना दिखा रही है। मंत्री के दौरे ने इन खामियों को उजागर कर प्रशासन और ठेकेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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