सम्पूर्ण समाधान दिवस: प्रशासन की तत्परता या औपचारिकता ?

बिजनौर। जिले में प्रशासनिक स्तर पर जनसुनवाई और समस्याओं के निस्तारण को लेकर ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने तहसील नजीबाबाद में भारत रत्न चौधरी चरण सिंह सभागार में इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसामान्य की शिकायतों का गुणवत्तापरक और त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
जनसमस्याओं के समाधान का दावा
सम्पूर्ण समाधान दिवस का उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों को सुनकर मौके पर ही उनका समाधान करना है। यदि किसी समस्या का तत्काल निस्तारण संभव नहीं हो, तो उसे एक सप्ताह के भीतर हल करने का प्रावधान किया गया है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शिकायतों के निस्तारण में शिकायतकर्ता की संतुष्टि अनिवार्य होगी।
आंकड़ों की हकीकत
कार्यक्रम में कुल 18 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 08 राजस्व विभाग, 04 पुलिस, 03 विकास विभाग और 03 अन्य मामलों से जुड़ी थीं। इनमें से मात्र 02 शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया, जबकि शेष शिकायतों के लिए समयबद्ध समाधान का आश्वासन दिया गया। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली इतनी प्रभावी है कि वे सभी शिकायतों को निष्पक्ष और समयसीमा के भीतर हल कर पाएंगे?
प्रभावशीलता पर सवाल
हालांकि सम्पूर्ण समाधान दिवस प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन आंकड़ों पर नजर डालें तो इसका प्रभाव सीमित नजर आता है। मौके पर मात्र 11% शिकायतों का निस्तारण यह दर्शाता है कि या तो समस्याओं का समाधान त्वरित नहीं हो पा रहा है या फिर औपचारिकता अधिक निभाई जा रही है।
इसके अलावा, यह भी महत्वपूर्ण है कि जिन शिकायतों का निस्तारण नहीं हो पाया, उन्हें एक सप्ताह में हल करने की गारंटी देने के बावजूद नागरिकों को समाधान मिलने की कितनी संभावना है? क्या पहले से लंबित शिकायतों का भी इतनी ही गंभीरता से निस्तारण हो रहा है?
सकारात्मक पक्ष
इस आयोजन का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई शिकायत निपटाई नहीं जा सकती, तो शिकायतकर्ता को स्पष्ट कारण बताया जाएगा। यह पारदर्शिता की दिशा में एक सराहनीय कदम हो सकता है, जिससे बार-बार एक ही समस्या के लिए आवेदन करने की आवश्यकता न पड़े।
सम्पूर्ण समाधान दिवस एक अच्छी पहल जरूर है, लेकिन इसके प्रभावी होने के लिए इसे केवल औपचारिकता तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर मजबूत बनाना आवश्यक है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि नागरिकों की शिकायतें केवल फाइलों में न उलझें, बल्कि उनका वास्तविक समाधान भी हो। अन्यथा, यह कार्यक्रम मात्र एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बनकर रह जाएगा, जिसका जनता को कोई ठोस लाभ नहीं मिलेगा।












