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“CM डैशबोर्ड में फिसला बिजनौर, CDO सख्त—6 जिला अधिकारियों से 3 दिन में जवाब तलब”

बिजनौर में विकास कार्यों की रफ्तार पर प्रशासन सख्त: खराब रैंकिंग पर 6 अधिकारियों को ‘प्रतिकूल प्रविष्टि’ की चेतावनी, 3 दिन में मांगा जवाब

बिजनौर | 16 मार्च 2026। TargetTvLive 

जनपद में विकास योजनाओं की सुस्त रफ्तार पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जारी फरवरी 2026 की रैंकिंग में जनपद की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप न रहने पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) रणविजय सिंह ने नाराजगी जाहिर करते हुए छह जिला स्तरीय अधिकारियों को ‘प्रतिकूल प्रविष्टि’ (Adverse Entry) देने की चेतावनी दी है। साथ ही संबंधित विभागों से तीन कार्य दिवस के भीतर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण तलब किया गया है।

सीडीओ ने स्पष्ट किया कि यदि मार्च माह में योजनाओं की प्रगति में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शासन स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री डैशबोर्ड में गिरा प्रदर्शन, बढ़ी प्रशासन की चिंता

सीडीओ रणविजय सिंह के अनुसार फरवरी 2026 की मुख्यमंत्री डैशबोर्ड रैंकिंग में बिजनौर जिले को विकास कार्यों के आधार पर प्रदेश में 47वीं रैंक तथा समग्र प्रदर्शन में 39वीं रैंक प्राप्त हुई है।
यह स्थिति प्रशासन के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि कई प्रमुख योजनाओं में अपेक्षित प्रगति दर्ज नहीं की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की रैंकिंग सीधे तौर पर जिलों की प्रशासनिक सक्रियता और योजनाओं के क्रियान्वयन की गुणवत्ता को दर्शाती है।

इन योजनाओं में सबसे ज्यादा गिरावट

समीक्षा में कई महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति कमजोर पाई गई। प्रमुख योजनाओं की स्थिति इस प्रकार रही —

  • एनआरएलएम आरएफ-सीआईएफ योजना – जनवरी में ‘D’ ग्रेड, फरवरी में केवल ‘C’ ग्रेड
  • मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) – ‘A’ ग्रेड से गिरकर सीधे ‘D’ ग्रेड
  • पोषण अभियान – लगातार ‘C’ ग्रेड पर स्थिर
  • सेतु निर्माण योजना – ‘B’ से गिरकर ‘C’ ग्रेड
  • ओडीओपी टूलकिट योजना – ‘D’ ग्रेड
  • मुख्यमंत्री युवा उद्यमी व स्वरोजगार योजना – अपेक्षित सुधार नहीं
  • अनुसूचित जनजाति दशमोत्तर छात्रवृत्ति – ‘A’ से गिरकर ‘C’ ग्रेड

इन योजनाओं में गिरावट से जिले की समग्र रैंकिंग पर सीधा असर पड़ा है।

सघन मॉनिटरिंग में कमी पर अधिकारियों से जवाब तलब

सीडीओ ने कहा कि योजनाओं के सघन पर्यवेक्षण और अनुश्रवण में कमी प्रशासन के लिए गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करना चाहिए, ताकि लाभ सीधे आम जनता तक पहुंच सके।

इसी को ध्यान में रखते हुए सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तीन कार्य दिवस के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट और सुधारात्मक कार्ययोजना प्रस्तुत करें।

मार्च बना ‘निर्णायक महीना’

वित्तीय वर्ष 2025-26 का अंतिम महीना होने के कारण मार्च को प्रशासन ने बेहद महत्वपूर्ण माना है।
सीडीओ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि इस माह में योजनाओं की प्रगति में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों को शासन की प्राथमिकताओं में रुचि न लेने का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की जाएगी

क्या होता है ‘प्रतिकूल प्रविष्टि’

प्रशासनिक सेवा में ‘प्रतिकूल प्रविष्टि’ किसी अधिकारी के वार्षिक गोपनीय आख्या (ACR) में दर्ज की जाने वाली नकारात्मक टिप्पणी होती है।
इसका असर अधिकारी की प्रमोशन, पदस्थापन और सेवा रिकॉर्ड पर पड़ सकता है। इसलिए इसे प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चेतावनी माना जाता है।

विश्लेषण: योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश

विशेषज्ञों के अनुसार मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के जरिए सरकार जिलों की कार्यप्रणाली पर लगातार नजर रख रही है। ऐसे में बिजनौर जैसे जिलों में प्रशासन की सख्ती को विकास योजनाओं की गति तेज करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

यदि मार्च में सुधार होता है तो जिले की रैंकिंग में भी बदलाव संभव है, अन्यथा कई अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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