सीवेज से साफ पानी तक का सफर: विद्यार्थियों ने 58 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट में देखा ‘गंदे पानी’ का विज्ञान

पर्यावरण विज्ञान के छात्रों का मुरादाबाद के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का शैक्षणिक भ्रमण, सीखे अपशिष्ट जल प्रबंधन के व्यावहारिक गुर
मुरादाबाद। TargetTvLive
पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन की वास्तविक समझ केवल किताबों से नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर देखने-समझने से विकसित होती है। इसी उद्देश्य से गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के एम.एससी. पर्यावरण विज्ञान प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने मुरादाबाद के गुलाबाड़ी पीतल नगरी स्थित 58 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का शैक्षणिक भ्रमण किया।
इस दौरान विद्यार्थियों ने न केवल सीवेज शोधन की तकनीकी प्रक्रिया को करीब से देखा, बल्कि यह भी जाना कि शहरों में निकलने वाला गंदा पानी किस तरह वैज्ञानिक विधियों के जरिए शुद्ध किया जाता है और फिर पर्यावरण को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
14 नालों का गंदा पानी पहुंचता है इस प्लांट में
भ्रमण के दौरान छात्रों को बताया गया कि यह 58 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मुरादाबाद शहर के करीब 14 प्रमुख नालों से जुड़ा हुआ है।
इन नालों से प्रतिदिन भारी मात्रा में निकलने वाला अपशिष्ट जल इस प्लांट में लाया जाता है, जहां कई चरणों में उसकी सफाई की जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस तरह के प्लांट न हों तो यह गंदा पानी सीधे नदियों और जमीन में मिलकर जल प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट को बढ़ा सकता है।
छात्रों ने समझी सीवेज ट्रीटमेंट की पूरी प्रक्रिया
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने प्लांट में मौजूद विभिन्न ट्रीटमेंट यूनिट्स को देखा और उनके काम करने के तरीके को समझा।
प्लांट के विशेषज्ञों ने छात्रों को बताया कि गंदे पानी को साफ करने के लिए कई चरणों में प्रक्रिया चलती है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं—
- प्राथमिक उपचार (Primary Treatment) – बड़े ठोस कचरे को अलग किया जाता है
- द्वितीयक उपचार (Biological Treatment) – बैक्टीरिया और जैविक प्रक्रियाओं से अशुद्धियों को हटाया जाता है
- तृतीयक उपचार (Advanced Treatment) – पानी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त शोधन
इन प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद पानी काफी हद तक साफ हो जाता है और इसे सुरक्षित तरीके से पर्यावरण में छोड़ा जाता है।
पर्यावरण संरक्षण में अपशिष्ट जल प्रबंधन की अहम भूमिका
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अपशिष्ट जल प्रबंधन (Wastewater Management) आज के शहरी जीवन की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण शहरों में प्रतिदिन लाखों लीटर गंदा पानी निकलता है। यदि इसे बिना उपचार के नदियों या जमीन में छोड़ दिया जाए तो इससे—
- जल स्रोत प्रदूषित हो सकते हैं
- भूजल की गुणवत्ता प्रभावित होती है
- मानव स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता है
- जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचता है
ऐसे में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर्यावरण सुरक्षा की एक मजबूत कड़ी के रूप में काम करते हैं।
शिक्षकों के मार्गदर्शन में मिला व्यावहारिक ज्ञान
इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान प्रो. अनामिका त्रिपाठी, डॉ. अदीबा खान, डॉ. सतेंद्र त्रिपाठी और डॉ. सचिन शर्मा के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने प्लांट की कार्यप्रणाली और जल गुणवत्ता मानकों को विस्तार से समझा।
शिक्षकों ने छात्रों को बताया कि पर्यावरण विज्ञान केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी वास्तविक समझ ऐसे ही प्रयोगात्मक और व्यावहारिक अनुभवों से विकसित होती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने की पहल की सराहना
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन माहेश्वरी ने इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमणों को छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक तकनीकों को समझने का अवसर मिलता है।
वहीं रजिस्ट्रार गिरीश द्विवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय इस तरह की गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है और विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराता रहेगा।
नगर निगम टीम ने भी किया मार्गदर्शन
इस कार्यक्रम के आयोजन में प्रो. अनामिका त्रिपाठी और डॉ. वैशाली पूनिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं नगर निगम की सुपरवाइज़र विधि कुमारी तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की तकनीकी टीम ने छात्रों को ट्रीटमेंट की पूरी प्रक्रिया समझाई और प्लांट के संचालन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
छात्रों ने बताया ज्ञानवर्धक अनुभव
भ्रमण में शामिल विद्यार्थियों ने इसे बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक अनुभव बताया। उनका कहना था कि इस दौरे से उन्हें—
- सीवेज ट्रीटमेंट की वास्तविक प्रक्रिया देखने का मौका मिला
- पर्यावरण संरक्षण में अपशिष्ट जल प्रबंधन का महत्व समझ आया
- जल प्रदूषण नियंत्रण की आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिली
छात्रों के अनुसार इस तरह के भ्रमण भविष्य में पर्यावरण वैज्ञानिक बनने की दिशा में महत्वपूर्ण सीख प्रदान करते हैं।
क्यों जरूरी हैं ऐसे शैक्षणिक भ्रमण
विशेषज्ञों के अनुसार आज के दौर में पर्यावरण शिक्षा को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना बेहद जरूरी है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसे स्थानों का दौरा छात्रों को यह समझने में मदद करता है कि शहरों का स्वच्छ भविष्य वैज्ञानिक तकनीकों और प्रभावी प्रबंधन पर ही निर्भर करता है।
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