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“अफसरों पर भरोसा नहीं, मेरी छवि खराब कर दी”- मुरादाबाद महापौर का खुलासा

“मेरा मान-सम्मान बचाओ, अफसरों पर भरोसा नहीं”

मुरादाबाद मेयर की गुहार: बुलडोजर कार्रवाई से 75 लाख का नुकसान, प्रशासन बनाम मेयर विवाद ने पकड़ी सियासी गर्मी
मुरादाबाद | 15 मार्च | Target TV Live

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में प्रशासन और नगर निगम के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। मुरादाबाद के भाजपा नेता और महापौर विनोद अग्रवाल ने प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्री कार्यालय को एक भावुक पत्र लिखकर कहा है— “मेरा मान-सम्मान बचाओ, मुझे स्थानीय अफसरों पर भरोसा नहीं है।”

महापौर ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान उनकी जमीन की 55 मीटर लंबी बाउंड्री वॉल पर बुलडोजर चला दिया गया, जिससे उन्हें करीब 75 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भाजपा के भीतर भी मेयर बनाम प्रशासन का मामला चर्चा का विषय बन गया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँची शिकायत

महापौर ने यह शिकायत प्रदेश के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को भेजे पत्र में की है। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी नोटिस और बिना सुनवाई का अवसर दिए उनकी जमीन पर बनी बाउंड्रीवाल को तोड़ दिया गया।

महापौर का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2017 में ग्राम धीमरी क्षेत्र में भूमि का विधिवत बैनामा कराया था और राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज होने के बाद वहां बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया गया था।

बुलडोजर कार्रवाई से “टूटा मनोबल”

महापौर ने अपने पत्र में केवल आर्थिक नुकसान की बात ही नहीं कही, बल्कि यह भी लिखा कि इस कार्रवाई से उनका मनोबल भी टूट गया है।
उनका आरोप है कि यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है और इसमें कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला

महापौर ने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई Supreme Court of India के उन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है जिनमें अतिक्रमण हटाने से पहले न्यूनतम 15 दिन का नोटिस देना अनिवार्य बताया गया है।

भाजपा नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे विवाद में भाजपा के बड़े नेताओं की चुप्पी भी चर्चा में है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन-उर्वरक मंत्री Jagat Prakash Nadda, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Bhupendra Singh Chaudhary और संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री Suresh Khanna हाल के दिनों में एक निजी शिक्षण संस्थान के कार्यक्रम में शामिल होते रहे, लेकिन मेयर बनाम प्रशासन विवाद पर किसी ने सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर भाजपा नेतृत्व की चुप्पी से स्थानीय राजनीति में कई तरह के संदेश जा रहे हैं।

निष्पक्ष जांच की मांग

महापौर ने अपने पत्र में मांग की है कि इस मामले की जांच किसी अन्य जिले के अधिकारी से कराई जाए, ताकि जांच निष्पक्ष हो सके। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और राजस्व अधिकारियों पर भरोसा न होने की बात भी कही है।

 क्यों बना बड़ा मुद्दा?

मुरादाबाद में यह विवाद कई कारणों से अहम माना जा रहा है:

एक निर्वाचित महापौर बनाम प्रशासन का टकराव

बुलडोजर कार्रवाई पर कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की खामोशी

स्थानीय राजनीति में नई खींचतान की संभावना

यदि इस मामले में उच्च स्तर से जांच बैठती है तो यह विवाद प्रदेश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।

निष्कर्ष

मुरादाबाद में मेयर और प्रशासन के बीच खड़ा हुआ यह विवाद केवल एक बाउंड्रीवाल या बुलडोजर कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है। यह अब राजनीतिक प्रतिष्ठा, प्रशासनिक प्रक्रिया और सत्ता-व्यवस्था के संतुलन का सवाल बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रदेश नेतृत्व इस मामले में क्या रुख अपनाता है।

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