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देश के बड़े कृषि वैज्ञानिक सिखाएंगे खेती के नए फॉर्मूले, बिजनौर के किसानों के लिए 7 दिन का विशेष कार्यक्रम

करनाल में मिलेगा आधुनिक खेती का गुर! बिजनौर के किसानों के लिए 7 दिन का विशेष प्रशिक्षण, नई तकनीकों से बढ़ेगी आय

विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट। अवनीश त्यागी 

बिजनौर। किसानों को आधुनिक खेती, नई तकनीकों और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से कृषि विभाग बिजनौर ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (SMAE) – आत्मा योजना के अंतर्गत किसानों के लिए राज्य के बाहर 7 दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 15 मार्च 2026 से 21 मार्च 2026 तक हरियाणा के करनाल में आयोजित होगा, जहां देश के प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थानों में किसानों को आधुनिक खेती की बारीकियां सिखाई जाएंगी।

यह कार्यक्रम किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक, टिकाऊ और अधिक लाभकारी कृषि मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

देश के शीर्ष कृषि संस्थानों में होगा प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को करनाल स्थित देश के प्रतिष्ठित कृषि संस्थानों का भ्रमण कराया जाएगा, जहां विशेषज्ञ वैज्ञानिक उन्हें खेती की नई तकनीकों, उन्नत बीजों, डेयरी प्रबंधन और मृदा सुधार के बारे में जानकारी देंगे।

प्रमुख संस्थान जहां प्रशिक्षण होगा:

  • भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल
  • राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल
  • भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, करनाल
  • गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, करनाल
  • केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल

इन संस्थानों में किसानों को फसल उत्पादकता बढ़ाने, नई किस्मों, जल प्रबंधन, पशुपालन और मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

क्यों खास है यह प्रशिक्षण कार्यक्रम

विशेषज्ञों के अनुसार आज के समय में खेती केवल परंपरागत अनुभव पर आधारित नहीं रह गई है, बल्कि तकनीक, अनुसंधान और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग आवश्यक हो गया है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को सीधे वैज्ञानिकों से जुड़ने का अवसर देते हैं।

इस प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को यह समझने का मौका मिलेगा कि—

  • कम लागत में अधिक उत्पादन कैसे लिया जाए
  • मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के उपाय
  • उन्नत बीजों और नई फसल किस्मों का उपयोग
  • डेयरी और कृषि के संयुक्त मॉडल से आय बढ़ाना
  • जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई तकनीक

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

सरकार का लक्ष्य किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें आय बढ़ाने वाले टिकाऊ कृषि मॉडल से जोड़ना है। करनाल के इन प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण से किसानों को नई तकनीक सीखने और उसे अपने खेतों में लागू करने का अवसर मिलेगा।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह और नई तकनीकों को अपनाते हैं, तो उनकी लागत कम होगी और उत्पादन तथा मुनाफा दोनों बढ़ेंगे।

कृषि विभाग बिजनौर की पहल

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि विभाग, जनपद बिजनौर द्वारा आयोजित किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य किसानों को राष्ट्रीय स्तर के कृषि अनुसंधान संस्थानों से जोड़कर खेती को अधिक लाभकारी और आधुनिक बनाना है।

विश्लेषण : क्यों जरूरी हैं ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम

भारत में खेती का भविष्य अब तकनीक आधारित कृषि पर निर्भर होता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन, घटती भूमि और बढ़ती लागत के बीच किसानों को नई खेती तकनीक, उन्नत बीज और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाना जरूरी है।

ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को केवल जानकारी ही नहीं देते बल्कि उन्हें नई सोच, नेटवर्क और बाजार से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं। यही कारण है कि सरकार अब किसानों को देश के प्रमुख कृषि अनुसंधान केंद्रों तक सीधे पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है।

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