Target Tv Live

जब हौसला बड़ा हो तो हालात छोटे पड़ जाते हैं—डॉ. प्रियंका सौरभ की प्रेरक कहानी

महिला दिवस विशेष 

चूल्हे से चाँद तक: शिक्षिका-लेखिका डॉ. प्रियंका सौरभ की प्रेरक सफलता कहानी

महिला दिवस विशेष रिपोर्ट।
संघर्ष और संकल्प की मिसाल बनीं शिक्षिका व लेखिका डॉ. प्रियंका सौरभ आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती हैं। हरियाणा के हिसार जिले के आर्यनगर गाँव में जन्मी डॉ. प्रियंका सौरभ ने साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर शिक्षा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय पहचान बनाई है।

स्नातक के दौरान विवाह होने के बाद उनके सामने परिवार की अनेक जिम्मेदारियाँ आ गईं, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को रुकने नहीं दिया। घरेलू दायित्वों के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए राजनीति विज्ञान में डबल एम.ए., एम.फिल तथा पीएचडी शोध कार्य की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं। उनकी मेहनत का परिणाम यह रहा कि उनका पाँच बार सरकारी सेवा में चयन हुआ और अंततः उन्होंने हरियाणा शिक्षा विभाग में प्रवक्ता के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।

शिक्षण के साथ-साथ डॉ. प्रियंका सौरभ ने साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रिय योगदान दिया है। उनकी रचनाओं में स्त्री जीवन की संवेदनाएँ, सामाजिक मुद्दे और मानवीय संबंधों की गहराई दिखाई देती है। अब तक उनकी 10 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें दीमक लगे गुलाब, चूल्हे से चाँद तक, मौन की मुस्कान, निर्भयें और आँचल की चुप्पी जैसी कृतियाँ विशेष रूप से चर्चित हैं। विभिन्न समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में उनके 10 हजार से अधिक लेख प्रकाशित हो चुके हैं।

साहित्य और समाज के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें आईपीएस मानव पुरस्कार, नारी रत्न और सुपर वुमन अवार्ड सहित कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ. प्रियंका सौरभ की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास हो तो परिस्थितियाँ भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। महिला दिवस के अवसर पर उनकी यह कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती है।

(लेखक: डॉ. विजय गर्ग, सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं शिक्षाविद, मलोट, पंजाब)

Leave a Comment

यह भी पढ़ें