“तिब्बत मुक्ति अभियान को यूपी में नई ताकत:
भारत-तिब्बत मैत्री संघ की केंद्रीय समिति में ओंकार सिंह की एंट्री, बड़े आंदोलन की तैयारी”
भारत-तिब्बत मैत्री संघ ने सक्रिय योगदान को देखते हुए ओंकार सिंह को सौंपी केंद्रीय कार्यसमिति की जिम्मेदारी, उत्तर प्रदेश में तिब्बत-हिमालय मुद्दों पर बढ़ेंगी गतिविधियां
नई दिल्ली/लखनऊ: भारत-तिब्बत संबंधों और तिब्बत की स्वतंत्रता से जुड़े अभियान को मजबूत करने की दिशा में भारत-तिब्बत मैत्री संघ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। संगठन ने ओंकार सिंह को केंद्रीय कार्यसमिति का सदस्य नियुक्त करते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश में तिब्बत से जुड़े अभियानों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
नई दिल्ली से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार यह नियुक्ति 20 फरवरी 2026 को की गई। पत्र में संगठन के पदाधिकारियों ने ओंकार सिंह के सक्रिय योगदान की सराहना करते हुए उम्मीद जताई है कि उनके मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में तिब्बत और हिमालय से जुड़े मुद्दों पर गतिविधियां और तेज होंगी।
तिब्बत मुक्ति साधना और “हिमालय बचाओ-तिब्बत बचाओ” अभियान में सक्रिय भूमिका
पत्र में उल्लेख किया गया है कि ओंकार सिंह लंबे समय से तिब्बत मुक्ति साधना तथा “हिमालय बचाओ-तिब्बत बचाओ” जैसे अभियानों में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।
संगठन ने यह भी कहा कि परम पावन 14th Dalai Lama के 90वें जन्मवर्ष के अवसर पर देशभर में तिब्बत के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें ओंकार सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उत्तर प्रदेश में बड़े कार्यक्रमों की तैयारी
पत्र के अनुसार संगठन को उम्मीद है कि आने वाले समय में ओंकार सिंह के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में:
- तिब्बत और भारत की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता अभियान
- राज्य स्तरीय सम्मेलन और संगोष्ठियां
- हिमालयी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम
- तिब्बत के समर्थन में जनजागरण अभियान
जैसी गतिविधियां व्यापक स्तर पर आयोजित होंगी।
राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर सौंपी जिम्मेदारी
यह जिम्मेदारी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष Anand Kumar के निर्देश पर दी गई है। पत्र पर महासचिव Manoj Kumar के हस्ताक्षर भी हैं।
संगठन ने ओंकार सिंह से इस दायित्व को स्वीकार करने का आग्रह करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
भारत-तिब्बत संबंधों के लिए क्यों अहम है यह कदम?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में तिब्बत के समर्थन में चलने वाले सामाजिक और सांस्कृतिक अभियानों का रणनीतिक महत्व भी है।
- तिब्बत को हिमालय की सुरक्षा से जोड़ा जाता है
- भारत-चीन भू-राजनीति में तिब्बत एक अहम मुद्दा है
- हिमालयी पारिस्थितिकी और जल संसाधनों पर भी इसका प्रभाव माना जाता है
ऐसे में राज्यों में सक्रिय सामाजिक संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
संगठन का उद्देश्य
भारत-तिब्बत मैत्री संघ (India-Tibet Friendship Society) का उद्देश्य:
- भारत-तिब्बत सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना
- तिब्बत की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के मुद्दे को वैश्विक मंच पर उठाना
- हिमालयी पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जनजागरण करना
निष्कर्ष
ओंकार सिंह की केंद्रीय कार्यसमिति में नियुक्ति को संगठन के विस्तार और तिब्बत समर्थक अभियानों को नई गति देने के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में तिब्बत और हिमालय से जुड़े मुद्दों पर बड़े कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना भी जताई जा रही है।











