Target Tv Live

“खामोश हो गई सच की कलम…”: पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मुस्तकीम का निधन, मुरादाबाद में उमड़ा जनसैलाब

“सत्य की कलम थम गई…”: पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मुस्तकीम का निधन, खोजी रिपोर्टिंग और बेबाक पत्रकारिता की एक युगांतकारी आवाज़ खामोश

मुरादाबाद में पत्रकारिता का एक युग समाप्त: पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मुस्तकीम को नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक
विशेष रिपोर्ट। एम. पी. सिंह 

मुरादाबाद | 07 मार्च 2026

मुरादाबाद की पत्रकारिता जगत को गहरा आघात देते हुए प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के वरिष्ठ पत्रकार, समाज विज्ञानी और बहुआयामी व्यक्तित्व डॉ. मुस्तकीम (63) का शुक्रवार शाम निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकारिता, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

शनिवार सुबह हरथला स्थित आवास से उनका जनाजा उठाया गया। नमाज-ए-जनाजा के बाद उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जिसमें शहर के पत्रकारों, साहित्यकारों, राजनीतिक प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, समाजसेवियों और आम नागरिकों की बड़ी संख्या मौजूद रही।

डॉ. मुस्तकीम: एक पत्रकार नहीं, एक संस्था

डॉ. मुस्तकीम केवल पत्रकार ही नहीं बल्कि खोजी पत्रकारिता, सामाजिक सरोकार और बौद्धिक प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण थे।

  • वे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के वरिष्ठ संवाददाता रहे।
  • क्रिकेट विषय पर डॉक्टरेट (PhD) हासिल की थी।
  • विश्व स्तरीय हैंडराइटिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
  • क्रिकेट में वे रणजी ट्रॉफी के रिजर्व विकेटकीपर भी रह चुके थे।

उनकी लेखनी में तथ्य, विश्लेषण और निर्भीकता का दुर्लभ संयोजन दिखाई देता था।

खोजी पत्रकारिता की मिसाल: किडनी कांड से लेकर बड़े खुलासे

डॉ. मुस्तकीम की पत्रकारिता की सबसे बड़ी पहचान उनकी खोजी रिपोर्टिंग रही।

प्रमुख खुलासे

  • मायावती सरकार के दौरान मुरादाबाद के बहुचर्चित किडनी कांड पर उनकी रिपोर्ट ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं।
  • नोएडा में शशांक शेखर की कोठी से जुड़े एक मामले पर उनकी खोजी खबर ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।
  • उस रिपोर्ट को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने विधानसभा में उठाया, जिसके बाद जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।

इन घटनाओं ने साबित किया कि स्थानीय पत्रकारिता भी सत्ता के गलियारों को हिला सकती है

राजनीति में भी आजमाया हाथ

पत्रकारिता के साथ-साथ डॉ. मुस्तकीम को राजनीति में भी गहरी रुचि थी।

उन्होंने दो चुनाव लड़े:

  • मुरादाबाद (पश्चिम) विधानसभा सीट से इनेलो के टिकट पर
  • बरेली-मुरादाबाद स्नातक सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधान परिषद चुनाव

हालांकि दोनों चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उनकी राजनीतिक समझ और सक्रियता हमेशा चर्चा में रही।

समाज सेवा: जरूरतमंदों के लिए हमेशा तैयार

डॉ. मुस्तकीम की पहचान केवल पत्रकार के रूप में ही नहीं बल्कि समाजसेवी और मददगार व्यक्ति के रूप में भी थी।

  • पीड़ित और गरीब लोगों की मदद करना उनकी आदत थी
  • प्रशासनिक और राजनीतिक संपर्कों का उपयोग वे निजी लाभ के बजाय जनहित के लिए करते थे
  • सामाजिक मुद्दों पर वे खुलकर आवाज उठाते थे

उनके सहयोगियों के अनुसार, “वे पत्रकारिता को नौकरी नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम मानते थे।”

परिवार और व्यक्तिगत जीवन

डॉ. मुस्तकीम अपने पीछे एक शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार छोड़ गए हैं।

परिवार में शामिल हैं:

  • सरकारी अध्यापिका पत्नी
  • एक बेटा
  • दो बेटियां

परिवारिक पृष्ठभूमि भी प्रतिष्ठित रही:

  • उनके पिता रेलवे में अधिकारी थे

  • बड़े भाई मुरादाबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं

  • छोटे भाई खाड़ी देशों में लंबे समय तक इंजीनियर रहे

अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब

शनिवार सुबह हुई नमाज-ए-जनाजा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

जनाजे में मौजूद लोगों ने कहा:

“डॉ. मुस्तकीम का जाना पत्रकारिता के उस दौर का अंत है, जहां सत्य, निष्पक्षता और जनसेवा सर्वोपरि हुआ करती थी।”

मुरादाबाद के पत्रकारों ने इसे स्थानीय पत्रकारिता के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण थे डॉ. मुस्तकीम?

मीडिया विशेषज्ञों के अनुसार डॉ. मुस्तकीम का व्यक्तित्व तीन कारणों से खास था:

1️⃣ खोजी पत्रकारिता की परंपरा

उन्होंने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का काम किया।

2️⃣ पत्रकारिता और बौद्धिकता का संगम

क्रिकेट पर डॉक्टरेट और सामाजिक विश्लेषण उनकी बौद्धिक गहराई को दर्शाता है।

3️⃣ सत्ता से सवाल करने की हिम्मत

उनकी रिपोर्टिंग अक्सर सत्ता और प्रशासन के लिए असहज सवाल खड़े करती थी।

आज जब पत्रकारिता पर TRP, क्लिक और राजनीतिक दबाव का आरोप लगता है, तब डॉ. मुस्तकीम जैसे पत्रकारों की कमी और अधिक महसूस होती है।

निष्कर्ष

डॉ. मुस्तकीम का निधन केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं बल्कि पत्रकारिता की एक विचारधारा के अवसान जैसा है।

उनकी निर्भीक लेखनी, सामाजिक प्रतिबद्धता और ईमानदार पत्रकारिता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

डॉ मुस्तकीम, PTI पत्रकार मुरादाबाद, डॉ मुस्तकीम निधन, Moradabad journalist death, PTI senior journalist Mustakeem, किडनी कांड मुरादाबाद, मुरादाबाद पत्रकार

Leave a Comment

यह भी पढ़ें