बिजनौर बना रंगों का शहर: गणमान्यों के आवासों पर सजी होली मिलन की महफिलें
बिजनौर, 3 मार्च। डिजीटल न्यूज डेस्क । जनपद बिजनौर में होलिका दहन का पर्व इस वर्ष पारंपरिक आस्था, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक उल्लास के अद्भुत संगम के रूप में मनाया गया। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक हर गली-मोहल्ले में विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया गया। इसके साथ ही होली मिलन समारोहों ने सामाजिक एकजुटता और भाईचारे का संदेश दिया।
परंपरा और आस्था का प्रतीक बना होलिका दहन
जनपद मुख्यालय बिजनौर सहित नजीबाबाद, धामपुर, चांदपुर और अन्य कस्बों में सायंकाल शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों के नाश की कामना की।
धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस वर्ष भी लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए सूखी लकड़ियों और उपलों से होलिका सजाई।
होली मिलन समारोहों में दिखा सामाजिक समरसता का रंग
जनपद मुख्यालय पर कई गणमान्य व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के आवासों पर होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में विभिन्न वर्गों, समुदायों और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग एक मंच पर दिखाई दिए।
गुलाल लगाकर और मिठाइयाँ बांटकर लोगों ने आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, फाग गायन और पारंपरिक ढोलक की थाप ने माहौल को और भी रंगीन बना दिया।
सामाजिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह आयोजन?
विश्लेषण के अनुसार, ऐसे पर्व और सामूहिक आयोजन न केवल सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हैं, बल्कि समाज में संवाद और सौहार्द को भी मजबूत करते हैं। वर्तमान समय में जब सामाजिक विभाजन की चर्चाएं होती रहती हैं, तब इस प्रकार के सार्वजनिक आयोजन सकारात्मक संदेश देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि होली मिलन जैसे कार्यक्रम स्थानीय राजनीति और सामाजिक नेतृत्व के लिए भी संवाद का अवसर बनते हैं, जहां जनसमस्याओं पर अनौपचारिक चर्चा होती है और रिश्तों में गर्माहट बनी रहती है।
पर्यावरण के प्रति बढ़ी जागरूकता
इस बार कई स्थानों पर पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सीमित लकड़ी और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया गया। कुछ संगठनों ने ‘ग्रीन होली’ का संदेश भी दिया और जल संरक्षण का आह्वान किया।
बाजारों में दिखी रौनक
होली से एक दिन पहले ही बाजारों में रंग, गुलाल, पिचकारी और मिठाइयों की दुकानों पर भारी भीड़ देखने को मिली। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार इस वर्ष बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में अच्छा इजाफा हुआ है, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना है।
निष्कर्ष
जनपद बिजनौर में मनाया गया होलिका दहन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और आपसी भाईचारे का प्रतीक बनकर उभरा। परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ आयोजित हुए होली मिलन समारोहों ने यह साबित किया कि त्योहार समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
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