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दिल्ली में ‘नशा छोड़ो’ की हुंकार! हजारों युवाओं ने लिया राष्ट्र निर्माण का संकल्प

दिल्ली में गूंजा ‘नशा छोड़ो, राष्ट्र जोड़ो’ का संदेश! 78वें अणुव्रत स्थापना दिवस पर हजारों युवाओं की मैराथन, नेताओं ने दी कड़ी चेतावनी

यमुना क्रीड़ा स्थल बना सामाजिक जागरण का मंच नशामुक्त भारत, अंगदान और नैतिक मूल्यों पर जोर

नई दिल्ली। राजधानी के यमुना क्रीड़ा स्थल पर आयोजित 78वें अणुव्रत स्थापना दिवस ने इस बार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम का रूप नहीं लिया, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की खुली घोषणा साबित हुआ। ‘अणुव्रत मैराथन दौड़’ के माध्यम से युवाओं ने ‘नशा मुक्त जीवन संकल्प’ लिया और समाज में नैतिक मूल्यों, स्वास्थ्य जागरूकता तथा अंगदान के प्रति जनचेतना फैलाने का संदेश दिया।

इस आयोजन ने स्पष्ट कर दिया कि नशामुक्ति केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

“नशा युवा पीढ़ी के लिए गंभीर चुनौती” – रविंद्र सिंह इंद्राज

मंत्री रविंद्र सिंह इंद्राज ने अपने संबोधन में कहा—

“नशा आज समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसे समाप्त करने के लिए सरकार के साथ समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।”

उन्होंने अणुव्रत आंदोलन की सराहना करते हुए कहा कि नैतिकता, संयम और आत्मानुशासन के बिना किसी भी समाज का स्वस्थ विकास संभव नहीं है।

“स्वस्थ शरीर और स्वच्छ विचार ही सशक्त राष्ट्र की नींव” – आलोक कुमार

आलोक कुमार, अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा—

“आज की पीढ़ी केवल डिजिटल पीढ़ी नहीं, बल्कि परिवर्तन की अग्रदूत है। जब युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाते हैं, तो वही शक्ति राष्ट्र को आत्मनिर्भर और विकसित बनाती है।”

उन्होंने स्वास्थ्य जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति और अंगदान जैसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही स्टार्टअप संस्कृति, कौशल विकास और नवाचार को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।

“अणुव्रत केवल आंदोलन नहीं, आत्मशुद्धि का मार्ग” – भारत गौड़

भाजपा शाहदरा ज़िला प्रवक्ता एडवोकेट भारत गौड़ ने कहा—

“अणुव्रत केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सामाजिक परिवर्तन का मार्ग है। नशा त्याग, सदाचार, संयम और सेवा इसके मूल आधार हैं, जिनसे व्यक्ति और समाज दोनों का कल्याण संभव है।”

कार्यक्रम में अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य महाभ्रमण की आज्ञा अनुवर्ती मुनि श्री उदित कुमार जी सहित कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

मैराथन में उमड़ा युवाओं का जोश

मैराथन में बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों ने भाग लेकर ‘नशा मुक्त जीवन’ का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को सम्मानित किया गया और सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

इस अवसर पर अंगदान के प्रति भी जागरूकता अभियान चलाया गया, जिससे समाज में जीवनदायिनी सोच को प्रोत्साहन मिले।

विश्लेषण: प्रतीकात्मक आयोजन या सामाजिक बदलाव की शुरुआत?

भारत में युवाओं के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है। विशेषज्ञों के अनुसार—

  • नशा स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है
  • पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में विघटन लाता है
  • अपराध दर और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाता है

ऐसे में अणुव्रत जैसे नैतिकता-आधारित अभियानों की प्रासंगिकता बढ़ जाती है। हालांकि दीर्घकालिक प्रभाव के लिए निरंतर जनसंवाद, पुनर्वास केंद्रों की मजबूती और शिक्षा आधारित जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष: युवा शक्ति ही परिवर्तन की धुरी

78वें अणुव्रत स्थापना दिवस पर आयोजित यह मैराथन एक स्पष्ट संदेश देकर गई—
नशामुक्ति केवल व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है।

जब युवा सकारात्मक सोच, संयम और सेवा भावना को अपनाते हैं, तो वही शक्ति राष्ट्र को विकसित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर करती है।

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