“दीक्षांत अंत नहीं, नई जिम्मेदारी की शुरुआत है” – डीयू के 102वें समारोह में उपराष्ट्रपति का युवा शक्ति को संदेश
1,20,408 डिजिटल डिग्रियां जारी, 734 शोधार्थियों को पीएचडी, ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प दोहराया
रिपोर्ट । डिजीटल न्यूज डेस्क
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सी.पी. राधाकृष्णन ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी का संदेश देते हुए कहा कि “दीक्षांत केवल समापन नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत है।”
विश्वविद्यालय के बहुउद्देशीय खेल परिसर में आयोजित भव्य समारोह में उपराष्ट्रपति ने एक क्लिक के साथ 1,20,408 विद्यार्थियों की डिजिटल डिग्रियां जारी कीं और 10 मेधावी छात्रों को स्वयं मेडल प्रदान किए। इस अवसर पर “बुक ऑफ हाइलाइट्स” का भी विमोचन किया गया।
“महान विश्वविद्यालय इमारतों से नहीं, मूल्यों से बनते हैं”
अपने प्रेरक संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की पहचान उसकी भव्य इमारतों से नहीं, बल्कि वहां विकसित होने वाले चरित्र, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारी की भावना से होती है।
उन्होंने कहा:
“डिग्री सिर्फ एक प्रमाण पत्र है, लेकिन सच्ची शिक्षा इंसानियत, अनुशासन और उत्तरदायित्व में दिखाई देती है।”
उन्होंने विकसित भारत–2047 के विज़न का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के स्नातक भारत के भविष्य के आर्किटेक्ट हैं और स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने में उनकी निर्णायक भूमिका होगी।
1922 से वैश्विक पहचान तक: डीयू की शैक्षणिक विरासत
उपराष्ट्रपति ने बताया कि 1922 में मात्र तीन कॉलेजों से शुरू हुआ यह विश्वविद्यालय आज 90 से अधिक महाविद्यालयों, हजारों शिक्षकों और शोधार्थियों के साथ वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है।
उन्होंने विश्वास जताया कि निरंतर बेहतर होती राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग के आधार पर दिल्ली विश्वविद्यालय जल्द ही विश्व के अग्रणी संस्थानों में शामिल होगा।
“यह देश हमारा है, इसकी चिंता भी हमें ही करनी होगी” – कुलपति
समारोह की अध्यक्षता करते हुए डीयू के कुलपति योगेश सिंह ने विद्यार्थियों से राष्ट्र के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार बनने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध और कोविड-19 जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद विश्वविद्यालय ने अपनी शैक्षणिक परंपरा को निरंतर बनाए रखा है।
दीक्षांत समारोह की प्रमुख उपलब्धियां
- कुल 1,20,408 विद्यार्थियों को डिग्रियां
- 734 शोधार्थियों को पीएचडी
- 112 गोल्ड मेडल (यूजी-पीजी)
- 1 सिल्वर मेडल
- 19 प्रमाण पत्र पुरस्कार
- 109003 यूजी, 11362 पीजी और 43 एफवाईयूपी विद्यार्थियों को डिग्री
- शताब्दी चांस के तहत 20 विद्यार्थियों को डिग्री
दूरदराज़ से दिल्ली तक: शिक्षा की नई उड़ान
उपराष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर सहित देश के दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश का हर युवा शिक्षा के माध्यम से नई ऊंचाइयों को छू रहा है, जो भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्ञान अर्जन एक सतत प्रक्रिया है और कोई भी शक्ति उच्च शिक्षा की प्रगति को रोक नहीं सकती।
विश्लेषण: क्यों खास है यह दीक्षांत?
डीयू का 102वां दीक्षांत केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि डिजिटल युग की ओर बढ़ते भारतीय उच्च शिक्षा तंत्र का प्रतीक भी है। 1.20 लाख से अधिक डिजिटल डिग्रियों का वितरण यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन तकनीकी पारदर्शिता और सुगमता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
‘विकसित भारत 2047’ की पृष्ठभूमि में यह समारोह युवाओं को केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि राष्ट्र नेतृत्व की भूमिका के लिए भी तैयार करने का संदेश देता है।
निष्कर्ष
दिल्ली विश्वविद्यालय का 102वां दीक्षांत समारोह शिक्षा, मूल्य और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व के संगम का प्रतीक बनकर उभरा। उपराष्ट्रपति का संदेश स्पष्ट था — डिग्री अंत नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारी की शुरुआत है।
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