होली से पहले लाखों पेंशनर्स के खाते खाली! 28 फरवरी का वादा टूटा?
अमरोहा/लखनऊ | 28 फरवरी 2026
होली जैसे बड़े पर्व से ठीक पहले पेंशन भुगतान को लेकर की गई सरकारी घोषणा उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब 28 फरवरी की शाम तक प्रदेश के कई जनपदों में पेंशनर्स के खातों में रकम नहीं पहुंची। सेवानिवृत कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन ने इसे “घोषणा और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर” बताया है।
क्या थी सरकार की घोषणा?
सरकार ने सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया था कि माह के अंतिम दिन, 28 फरवरी को सेवारत कर्मचारियों को वेतन और सेवानिवृत कर्मचारियों/पेंशनर्स को पेंशन जारी कर दी जाएगी, ताकि सभी परिवार होली का त्योहार आर्थिक तनाव के बिना मना सकें।
लेकिन शाम 6 बजे तक कई जिलों से भुगतान न होने की शिकायतें सामने आईं।
पेंशनर्स एसोसिएशन का आरोप: “सिस्टम की उदासीनता”
सेवानिवृत कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरनाथ यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बी.एल. कुशवाहा और महामंत्री ओ.पी. त्रिपाठी ने संयुक्त बयान में कहा कि—
- प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पेंशन न मिलने की सूचना मिली है।
- लाखों पेंशनर्स आर्थिक व मानसिक संकट में हैं।
- कई पेंशनर्स को त्योहार से पहले उधार मांगने की नौबत आ गई।
बी.एल. कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद भुगतान न होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
अमरोहा में भी नहीं पहुंची पेंशन
जनपद अमरोहा में भी पेंशन और वेतन समय पर न मिलने की शिकायतें सामने आईं। पेंशनर्स एसोसिएशन के जिला पदाधिकारियों—अनूप सिंह पेसल (अध्यक्ष), शिवेन्द्र सिंह चिकारा (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), राजेन्द्र सिंह राणा (जिला मंत्री) और अमीपाल सिंह (उपाध्यक्ष)—ने कहा कि भुगतान न होने से सैकड़ों परिवारों की होली फीकी रहने की आशंका है।
तुलना में बिहार आगे?
संगठन ने दावा किया कि बिहार सरकार ने होली को देखते हुए अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को 24 फरवरी को ही वेतन/पेंशन का भुगतान करा दिया।
इसके उलट उत्तर प्रदेश में समय से भुगतान न होने पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या घोषणा सिर्फ औपचारिकता थी?
बड़ा सवाल: तकनीकी देरी या प्रशासनिक लापरवाही?
विश्लेषकों का मानना है कि—
- वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में ट्रेजरी और बैंकिंग सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है।
- ई-पेमेंट प्रोसेस में तकनीकी अड़चनें भी देरी का कारण बन सकती हैं।
- लेकिन जब सार्वजनिक घोषणा हो चुकी हो, तो समयबद्ध क्रियान्वयन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
यदि देर तकनीकी कारणों से है तो सरकार को पारदर्शी स्पष्टीकरण देना चाहिए, ताकि भ्रम और आक्रोश कम हो सके।
पेंशनर्स की मांग
- लंबित पेंशन और वेतन का तत्काल भुगतान
- भविष्य में त्योहारों से पूर्व समयबद्ध भुगतान की गारंटी
- भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता
निष्कर्ष
होली जैसे पर्व पर पेंशन और वेतन में देरी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक असर भी डालती है। लाखों परिवार त्योहार की तैयारियों के लिए इसी आय पर निर्भर रहते हैं। अब निगाहें सरकार और वित्त विभाग पर हैं कि भुगतान कब तक सुनिश्चित होता है और क्या देरी पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आता है।
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