मसाने में महाहोली: धधकती चिताओं के बीच भस्म से रंगे अघोरी, काशी के श्मशान में उमड़ा देश-विदेश का सैलाब
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📍 काशी से आशुतोष की विशेष रिपोर्ट
धर्म और रहस्य की नगरी वाराणसी एक बार फिर अपनी अद्भुत परंपराओं के कारण वैश्विक चर्चा में है। होली से पहले रंगभरी एकादशी के अवसर पर जब काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के गौना की रस्म पूरी हुई, तभी से काशी में होली का आध्यात्मिक उत्सव शुरू हो गया।
इसी क्रम में हरिश्चंद्र घाट स्थित महाश्मशान पर धधकती चिताओं के बीच भस्म की होली खेली गई—जहां अघोरी, तांत्रिक और साधु-संतों ने चिताओं की राख को रंग बनाकर एक अनोखी परंपरा निभाई।
क्या है मसाने की होली? परंपरा, दर्शन और रहस्य
काशी की मसाने की होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के दार्शनिक सत्य का प्रतीक मानी जाती है।
यह परंपरा बताती है कि—
- जीवन क्षणभंगुर है
- मृत्यु अंतिम सत्य है
- और उत्सव हर परिस्थिति में संभव है
अघोरी और तांत्रिक मान्यता के अनुसार, भस्म से होली खेलना मृत्यु पर विजय और वैराग्य का प्रतीक है। आयोजकों के अनुसार, यह परंपरा दशकों पुरानी है, हालांकि सीमित रूप में यह पहले कुछ साधुओं तक ही सीमित थी। बीते वर्षों में सोशल मीडिया और डिजिटल कवरेज के कारण इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।
विदेशी सैलानियों का क्रेज: “विश्वास नहीं हुआ कि श्मशान में होती है होली”
पटना, दिल्ली, मध्यप्रदेश, कोलकाता से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक के सैलानी इस अद्भुत दृश्य को देखने पहुंचे।
- कोलकाता से आई एक पर्यटक ने कहा, “सोशल मीडिया पर देखा था, लेकिन जलती चिताओं के बीच होली—यह यकीन करना मुश्किल था।”
- ऑस्ट्रेलिया से आए सैलानी ने बताया कि पिछले साल उन्होंने वृंदावन में होली देखी थी, लेकिन काशी की मसाने की होली बिल्कुल अलग और रहस्यमयी है।
घाट पर बजते “होली खेले मसाने” गीत पर विदेशी सैलानी और युवा झूमते नजर आए। युवतियों ने भी घाट पर नृत्य किया, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें
धधकती चिताएं, राख में लिपटे अघोरी, भूत-पिशाच के वेश में कलाकार और उनके बीच उत्सव का माहौल—यह दृश्य कैमरों में कैद होते ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।
इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब व्लॉग्स और न्यूज पोर्टलों पर काशी की मसाने की होली छा गई है।
क्यों बढ़ रहा है मसाने की होली का आकर्षण?
विश्लेषकों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं—
- आध्यात्मिक पर्यटन का बढ़ता ट्रेंड
- रहस्य और तंत्र परंपराओं के प्रति युवाओं की जिज्ञासा
- डिजिटल मीडिया के जरिए वैश्विक पहुंच
- काशी की ब्रांडिंग एक “अद्भुत आध्यात्मिक शहर” के रूप में
परंपरा बनाम पर्यटन: उठ रहे सवाल
हालांकि इस आयोजन को लेकर कुछ सामाजिक और धार्मिक हलकों में बहस भी होती रही है—
- क्या श्मशान की पवित्रता पर असर पड़ता है?
- क्या यह आध्यात्मिक परंपरा का प्रदर्शन मात्र बनकर रह गई है?
फिर भी, स्थानीय साधु-संतों का मानना है कि यह काशी की सदियों पुरानी जीवंत परंपरा का हिस्सा है और इसे उसी भाव से देखा जाना चाहिए।
काशी: जहां मृत्यु भी उत्सव है
काशी को “महाश्मशान” की नगरी कहा जाता है। यहां जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी मिट जाती है।
मसाने की होली इसी दर्शन को जीवंत करती है—
जहां राख भी रंग है, श्मशान भी उत्सव है, और मृत्यु भी मोक्ष का मार्ग।
निष्कर्ष
धधकती चिताओं के बीच खेली जाने वाली यह भस्म होली केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की आध्यात्मिक पहचान का वैश्विक प्रतीक बन चुकी है।
देश-विदेश से उमड़ती भीड़ यह साबित करती है कि काशी आज भी रहस्य, श्रद्धा और अद्भुत परंपराओं की राजधानी है।
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