21 अप्रैल को देशभर में पेंशनर्स का महासंग्राम! 8वें वेतन आयोग, वित्त विधेयक 2025 और 12 सूत्रीय मांगों पर बड़ा आंदोलन तय
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गूगल मीट पर हुई प्रदेशव्यापी रणनीतिक बैठक, मार्च में हस्ताक्षर अभियान
अमरोहा/लखनऊ, 27 फरवरी 2026।
सेवानिवृत कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश की 25 फरवरी 2026 को गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी जनपदों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में आगामी आंदोलन की रूपरेखा, 8वें वेतन आयोग की स्थिति और वित्त विधेयक 2025 के विरोध को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में बताया गया कि अखिल भारतीय पेंशनर्स फेडरेशन के निर्णय के अनुसार 21 अप्रैल 2026 को सभी प्रदेशों में प्रांत स्तरीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जो आगे चलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप लेगा।
क्या हैं पेंशनर्स की मुख्य 12 मांगें?
बैठक में 12 सूत्रीय मांग पत्र पारित किया गया, जिनमें प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
- वित्त विधेयक 2025 को वापस लिया जाए
- पेंशनर्स को भी 8वें वेतन आयोग का लाभ दिया जाए
- पेंशन कॉम्यूटेशन की अवधि 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष की जाए
- वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स को महंगाई राहत में समुचित संशोधन
- चिकित्सा सुविधाओं में विस्तार एवं कैशलेस सुविधा
इन मांगों के समर्थन में मार्च माह में सभी जनपदों में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और हस्ताक्षरयुक्त याचिका प्रत्येक माह प्रदेश स्तर से भारत सरकार को भेजी जाएगी।
8वें वेतन आयोग पर देरी से नाराजगी
बैठक में इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गई कि 8वें वेतन आयोग का कार्यकाल 18 माह निर्धारित किया गया है, लेकिन अभी तक आयोग की ओर से कोई ठोस रिपोर्ट या सिफारिश सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे पेंशनर्स को संभावित लाभ मिलने में देरी की आशंका जताई जा रही है।
पदाधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते आयोग की सिफारिशें सामने नहीं आतीं तो लाखों पेंशनर्स को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
📍 अमरोहा रहेगा आंदोलन में अग्रणी
जनपद अमरोहा इकाई ने स्पष्ट किया कि वह प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर 21 अप्रैल के राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन में जोर-शोर से भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
बैठक में प्रमुख रूप से —
- अनूप सिंह पैसल (अध्यक्ष)
- शिवेन्द्र सिंह चिकारा (वरिष्ठ उपाध्यक्ष)
- राजेंद्र सिंह राणा (जिला मंत्री)
- अमीपाल सिंह (उपाध्यक्ष)
ने आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प दोहराया।
विश्लेषण: क्या सरकार पर पड़ेगा दबाव?
देशभर में पेंशनर्स की संख्या करोड़ों में है। यदि 21 अप्रैल को व्यापक स्तर पर धरना-प्रदर्शन होता है, तो यह केंद्र सरकार पर वित्तीय और नीतिगत दबाव बना सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि—
- वित्त विधेयक 2025 में संशोधन की मांग राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।
- 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में देरी विपक्ष को सरकार पर हमला करने का अवसर दे सकती है।
- संगठित हस्ताक्षर अभियान से जनमत तैयार करने में मदद मिलेगी।
आगे क्या?
मार्च में प्रदेश स्तर से सभी जनपदों को विस्तृत आंदोलन कार्यक्रम भेजा जाएगा। पेंशनर्स संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा।
निष्कर्ष
21 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं, बल्कि पेंशनर्स की आर्थिक सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा बड़ा अभियान बनता दिख रहा है। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार और 8वें वेतन आयोग की आगामी गतिविधियों पर टिकी हैं।
(डिजिटल डेस्क, अमरोहा)












