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DFO दफ्तर के बाहर बैंड-बाजा क्यों? SDO निलंबन के पीछे क्या ‘जांच से राहत’ की खुशी है? वन माफिया–तंत्र की परतें खुलीं

DFO दफ्तर के बाहर बैंड-बाजा क्यों? SDO निलंबन के पीछे क्या ‘जांच से राहत’ की खुशी है? वन माफिया–तंत्र की परतें खुलीं

अवनीश त्यागी की विशेष जांच रिपोर्ट | ग्राउंड से सत्ता तक

बिजनौर।
DFO कार्यालय के सामने बैंड-बाजा, नाच-गाना और मिठाई वितरण अब सिर्फ एक अजीब दृश्य नहीं रहा, बल्कि यह घटना वन विभाग, प्रशासन और कथित वन माफिया नेटवर्क के बीच के संबंधों की जांच की मांग बन चुकी है।

SDO ज्ञान सिंह के निलंबन के बाद जिस व्यक्ति ने स्वयं को बीजेपी का बूथ अध्यक्ष बताते हुए सार्वजनिक रूप से जश्न मनाया, उस पर वन विभाग का दावा है कि वह आधा दर्जन से अधिक वन अपराधों में नामजद आरोपी है।

जांच एंगल-1: क्या निलंबन से किसी को ‘तत्काल राहत’ मिली?

वन विभाग के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार,
SDO ज्ञान सिंह के कार्यकाल में

  • अवैध वृक्ष पातन पर सख्ती,
  • रिकवरी और केस दर्ज करने की गति,
  • तथा स्थानीय दबावों को नजरअंदाज करने

की शिकायतें नहीं, बल्कि कुछ प्रभावशाली लोगों में नाराजगी थी।

👉 ऐसे में सवाल उठता है—
क्या SDO का निलंबन उन तत्वों के लिए राहत है, जिन पर आगे और कार्रवाई हो सकती थी?

जांच एंगल-2: दर्ज केस तो हैं, लेकिन जो दर्ज नहीं हुए उनका क्या?

वन विभाग का आधिकारिक रिकॉर्ड बताता है कि उक्त व्यक्ति पर—

  • 2020-21 से 2025-26 तक
  • 180 से अधिक वृक्षों के अवैध पातन

के मामले दर्ज हैं।

लेकिन सूत्रों का दावा है कि—
यह आंकड़ा वास्तविक स्थिति से कम हो सकता है।

“कई ऐसे मामले हैं जिनकी सूचना कभी थाने या वन कार्यालय तक पहुंची ही नहीं,”
— विभागीय सूत्र

👉 यह जांच का बड़ा बिंदु है कि

  • कितने अवैध कटान
  • किसकी शह पर
  • और कैसे रिकॉर्ड से बाहर रह गए?

जांच एंगल-3: वन अपराध से आगे—अन्य आपराधिक नेटवर्क?

सूत्रों की मानें तो यह कथित लकड़ी माफिया
केवल वन अपराधों तक सीमित नहीं, बल्कि
अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी लिप्त बताया जाता है।

हालांकि इन आरोपों की

  • न तो FIR सार्वजनिक है
  • न ही आधिकारिक पुष्टि

लेकिन DFO कार्यालय के सामने खुलेआम जश्न
👉 इस व्यक्ति के हौसले और संरक्षण की ओर इशारा करता है।

जांच एंगल-4: निलंबन का असली कारण और उससे जुड़ा भ्रम

यह तथ्य बेहद अहम है कि
SDO ज्ञान सिंह का निलंबन सीधे वन मामलों से नहीं जुड़ा है।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार—

  • NHAI के कांट्रेक्टर से कथित मारपीट,
  • अपने कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई,

के संबंध में
जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर शासन ने निलंबन किया।

❗ लेकिन सवाल यह है—
जब निलंबन का कारण यह है,
तो वन अपराधों में घिरा व्यक्ति सबसे ज्यादा खुश क्यों है?

जांच एंगल-5: क्या यह ‘मैसेज’ है बाकी अधिकारियों के लिए?

प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि—

  • इस तरह का सार्वजनिक जश्न
  • एक मनोवैज्ञानिक दबाव भी हो सकता है।

 संदेश यह कि—

“जो ज्यादा सख्ती करेगा, उसका यही हश्र होगा।”

अगर ऐसा है, तो यह
वन विभाग के ईमानदार अधिकारियों के लिए खतरनाक संकेत है।

अब जांच में क्या होना चाहिए? (Key Demands)

अब विशेषज्ञ और जागरूक नागरिक मांग कर रहे हैं—

✔️ वायरल वीडियो/फोटो की फॉरेंसिक जांच
✔️ सभी दर्ज और अपंजीकृत वन अपराधों की स्पेशल ऑडिट
✔️ आरोपी व्यक्ति की राजनीतिक दावेदारी की सत्यता की जांच
✔️ यह जांच कि किस अधिकारी के कार्यकाल में कौन से केस रुके
✔️ स्वतंत्र एजेंसी या SIT से जांच

निष्कर्ष: यह सिर्फ निलंबन नहीं, सिस्टम की परीक्षा है

DFO कार्यालय के सामने बजा बैंड
सिर्फ खुशी का शोर नहीं,
बल्कि जंगल की चीख है।

अब फैसला शासन को करना है—
वन माफिया का मनोबल टूटेगा
या
ईमानदार कार्रवाई करने वाले अधिकारी।

यह मामला अब
जांच की मांग करता है, समझौते की नहीं।

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