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भारतीय प्रशासनिक कानून में नया अध्याय: डॉ. विवेक त्यागी की विश्वस्तरीय कृति

ग्राम पैजनियां से वैश्विक मंच तक: मास्टर नरदेव सिंह त्यागी के पुत्र डॉ. विवेक त्यागी ने बढ़ाया बिजनौर का गौरव

भारतीय प्रशासनिक न्याय प्रणाली को नई दिशा देने वाली कृति बनी अंतरराष्ट्रीय विमर्श का केंद्र

बिजनौर/मेरठ/नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के ग्राम पैजनियां की शांत ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर वैश्विक कानूनी मंचों तक अपनी पहचान स्थापित करने वाले डॉ. विवेक त्यागी आज भारतीय प्रशासनिक कानून के क्षेत्र में एक सशक्त और प्रतिष्ठित नाम बन चुके हैं। वे प्रख्यात शिक्षक मास्टर नरदेव सिंह के पुत्र हैं और अपनी नवीनतम अकादमिक कृति के माध्यम से भारत की प्रशासनिक न्याय प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने में सफल रहे हैं।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू), मेरठ के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (आईएलएस) में विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. विवेक त्यागी की पुस्तक
“Adjudicating Governance: The Dynamics of India’s Administrative Tribunal Framework”
को भारतीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल व्यवस्था पर अब तक के सबसे गंभीर, व्यापक और व्यावहारिक अध्ययनों में गिना जा रहा है।

शिक्षा और संस्कार की विरासत से निकली वैश्विक पहचान

डॉ. विवेक त्यागी तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं।
उनके दोनों बड़े भाई भी समाज के जिम्मेदार क्षेत्रों से जुड़े हैं—
एक भाई पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं, जबकि दूसरे भाई लॉ प्रोफेशनल के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा, कानून और सामाजिक चेतना से जुड़ा यह परिवार क्षेत्र के युवाओं के लिए एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।

पिता मास्टर नरदेव सिंह से मिली शैक्षिक प्रेरणा और अनुशासन ने डॉ. त्यागी के व्यक्तित्व और विद्वत्ता को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही कारण है कि एक ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्धिक पहचान बनाई।

पुस्तक का महत्व: प्रशासनिक न्याय की गहराई और भविष्य

डॉ. विवेक त्यागी की यह पुस्तक भारत की प्रशासनिक ट्रिब्यूनल व्यवस्था का संवैधानिक, न्यायिक और नीतिगत विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

पुस्तक की प्रमुख विशेषताएं:

  • संवैधानिक परिप्रेक्ष्य:
    अनुच्छेद 323A और 323B के अंतर्गत गठित ट्रिब्यूनल्स की भूमिका, अधिकार और विकास
  • समकालीन चुनौतियां:
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डेटा प्रोटेक्शन और तकनीकी शासन
  • नीतिगत सुझाव:
    त्वरित न्याय, संस्थागत पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार
  • प्रस्तावना:
    अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विधिवेत्ता प्रो. उपेंद्र बक्शी, जिन्होंने इसे प्रशासनिक कानून के सूक्ष्म आयामों की गहन व्याख्या बताया है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की कानूनी आवाज़

डॉ. विवेक त्यागी हाल के महीनों में दो अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड कांग्रेस में वक्ता और सह-आयोजक के रूप में शामिल हुए, जहां उन्होंने—

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
  • सस्टेनेबिलिटी
  • ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस
  • रिन्यूएबल एनर्जी

जैसे विषयों पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
इन मंचों पर उनकी सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि भारत अब केवल कानून का अनुयायी नहीं, बल्कि वैश्विक कानूनी विमर्श का नेतृत्वकर्ता बन रहा है।

राष्ट्रीय संदर्भ में बढ़ता महत्व

वर्तमान में भारत में 40 से अधिक प्रशासनिक ट्रिब्यूनल लाखों मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। ऐसे समय में जब केंद्र सरकार ट्रिब्यूनल सुधारों पर गंभीर मंथन कर रही है, डॉ. विवेक त्यागी की यह कृति—

  • नीति निर्धारकों के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज़
  • न्यायविदों के लिए मानक संदर्भ ग्रंथ
  • शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए अकादमिक आधार

के रूप में उभरकर सामने आई है।

सम्मानित मंच और अकादमिक गरिमा

पुस्तक का औपचारिक विमोचन एवं समर्पण विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला एवं प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. एन.सी. गौतम के समक्ष किया गया।
शिक्षाविदों और विधि विशेषज्ञों ने इसे भारतीय प्रशासनिक न्याय प्रणाली की अमूल्य बौद्धिक धरोहर बताया।

डॉ. विवेक त्यागी का अकादमिक योगदान

डॉ. त्यागी अब तक—

  • 30 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित कर चुके हैं
  • प्रशासनिक कानून, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय विधि के विशेषज्ञ हैं

प्रमुख पुस्तकें:

  • Legal Profession and Offshoring in India
  • Globalization and Human Rights
  • International Law in a Globalised World
  • Expedited Justice: The Journey of Administrative Tribunals in India

वक्तव्य

डॉ. विवेक त्यागी के अनुसार—

“ट्रिब्यूनल केवल विवाद निपटान की संस्था नहीं हैं,
बल्कि लोकतांत्रिक शासन को प्रभावी बनाने का माध्यम हैं।”

गांव से विश्व तक प्रेरक यात्रा

मास्टर नरदेव सिंह के पुत्र डॉ. विवेक त्यागी की यह यात्रा—
ग्राम पैजनियां, बिजनौर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंचों तक—
यह प्रमाणित करती है कि शिक्षा, संस्कार और सतत परिश्रम से वैश्विक पहचान संभव है।

उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और गांव के लिए, बल्कि पूरे बिजनौर जनपद और उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

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