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बुज़ुर्गों की पेंशन खतरे में? सरकार की नई नीति से पेंशनर्स नाराज़

बुज़ुर्गों की पेंशन खतरे में? सरकार की नई नीति से पेंशनर्स नाराज़

  • पेंशनर्स पर ‘नीति प्रहार’ का आरोप: डीए, वेतन आयोग और सुविधाओं पर संकट, सरकार के खिलाफ मुखर हुए सेवानिवृत्त कर्मचारी
  • वित्त अधिनियम 2025 और 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस को लेकर बढ़ी चिंता, अमरोहा के हसनपुर में पेंशनर्स एसोसिएशन की अहम बैठक
अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट 

अमरोहा/हसनपुर।
सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त लाखों पेंशनभोगियों के भविष्य को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पेंशनर्स संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार की हालिया नीतियाँ बुज़ुर्ग पेंशनर्स के आर्थिक अधिकारों को क्रमशः कमजोर कर रही हैं। इसी क्रम में तहसील शाखा हसनपुर (जनपद अमरोहा) में पेंशनर्स एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सरकार की कथित नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई।

बैठक की अध्यक्षता तहसील अध्यक्ष विपिन त्यागी ने की, जबकि संचालन तहसील मंत्री कुंवरपाल सिंह द्वारा किया गया। बैठक आर्य समाज मंदिर प्रांगण, हसनपुर में संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में पेंशनर्स ने भाग लिया।

सरकार पर क्या आरोप लगाए गए?

बैठक में तहसील मंत्री कुंवरपाल सिंह ने कहा कि—

  • कोरोना काल के दौरान 18 माह का डीए/डीआर आज तक नहीं दिया गया
  • रेलवे में वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रियायतें समाप्त कर दी गईं
  • 8वें वेतन आयोग के लिए बनाए गए Terms of Reference में पेंशनर्स को शामिल नहीं किया गया
  • इससे आशंका है कि आयोग पेंशनर्स के लिए कोई संस्तुति नहीं कर पाएगा

उनका कहना था कि यह सब एक सोची-समझी नीति का हिस्सा प्रतीत होता है, जिससे पेंशनर्स को भविष्य के लाभों से वंचित किया जा सके।

वित्त अधिनियम 2025 को लेकर विवाद

बैठक में साझा की गई जानकारी और सोशल मीडिया पर प्रसारित रिपोर्टों के अनुसार, वित्त अधिनियम 2025 को लेकर पेंशनर्स में भारी चिंता है।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि—

  • भविष्य में डीए वृद्धि पेंशनर्स पर लागू नहीं होगी
  • नए वेतन आयोगों के लाभ से सेवानिवृत्त कर्मचारी बाहर हो सकते हैं
  • किसी भी वित्तीय संशोधन का लाभ पूर्व प्रभाव (arrears) से नहीं मिलेगा

पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो यह 1982 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय की भावना के विपरीत होगा, जिसमें सभी पेंशनभोगियों के साथ समान व्यवहार की बात कही गई थी।

कानूनी और सामाजिक प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पेंशन को “सरकारी अनुकंपा” के रूप में परिभाषित किया गया, तो यह सामाजिक सुरक्षा की अवधारणा को कमजोर करेगा।
पेंशनर्स संगठनों का तर्क है कि पेंशन कोई दया नहीं, बल्कि जीवन भर की सेवा का अधिकार है।

आंदोलन की चेतावनी

तहसील अध्यक्ष विपिन त्यागी ने सभी पेंशनर्स से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि—

“यदि सरकार ने समय रहते पेंशनर्स की मांगों पर विचार नहीं किया, तो बुज़ुर्ग पेंशनर्स सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश स्तर से मिलने वाले किसी भी आंदोलनात्मक कार्यक्रम में हसनपुर तहसील पूरी ताकत से भाग लेगी।

बैठक में इन पेंशनर्स ने रखे विचार

बैठक को संबोधित करने वालों में प्रमुख रूप से—
रमेशचंद, महावीर शर्मा, विश्वनाथ जी, शशिराज शर्मा, रामलाल जी, योगेंद्र सिंह, रोहतास सिंह सहित अन्य पेंशनर्स शामिल रहे।

नेतृत्व

  • विपिन त्यागी – तहसील अध्यक्ष, हसनपुर
  • कुंवरपाल सिंह – तहसील मंत्री, हसनपुर
  • अनूप सिंह पेसल – अध्यक्ष, पेंशनर्स एसोसिएशन जनपद अमरोहा
  • शिवेन्द्र सिंह चिकारा – वरिष्ठ उपाध्यक्ष

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