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गजरौला जल प्रदूषण पर प्रशासन का निर्णायक एक्शन: DM की अध्यक्षता में हाईलेवल बैठक 

गजरौला जल प्रदूषण पर प्रशासन का निर्णायक एक्शन: DM की अध्यक्षता में हाईलेवल बैठक 

शुरू होगा समन्वित विशेष अभियान

हैंडपंप से फैक्ट्रियों तक जांच, कृषि उत्पादों व मानव स्वास्थ्य की सैंपलिंग, उद्योगों पर CTP जांच का शिकंजा

विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट अवनीश त्यागी 

अमरोहा | 05 जनवरी 2026
औद्योगिक नगरी गजरौला में लंबे समय से चली आ रही भू-जल प्रदूषण की गंभीर समस्या अब प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय एवं निर्णायक बैठक में जल प्रदूषण के स्थायी समाधान हेतु समन्वित, सख्त और समयबद्ध विशेष अभियान चलाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए।

यह बैठक केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि गजरौला ही नहीं बल्कि पूरे अमरोहा जनपद में जल सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और कृषि संरक्षण की दिशा में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखी जा रही है।

हर जल स्रोत प्रशासन की निगरानी में: हैंडपंप, बोरबेल, सबमर्सिबल और उद्योग

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अब

  • हैंडपंप,
  • बोरबेल व सबमर्सिबल पंप,
  • औद्योगिक प्रतिष्ठानों के जल स्रोत

सभी की वैज्ञानिक विधि से वॉटर लेवल और गुणवत्ता जांच की जाएगी। जिन स्थानों पर प्रदूषण या तकनीकी खामियाँ पाई जाएंगी, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

कृषि उत्पाद भी जांच के घेरे में: किसानों की सेहत और आजीविका पर प्रशासन की नजर

जल प्रदूषण के दुष्प्रभाव केवल पेयजल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा असर खेती और फसलों की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने
👉 कृषि उत्पादों की सैंपलिंग एवं लैब जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदूषित जल से सिंचित फसलें मानव उपभोग के लिए सुरक्षित हैं या नहीं, ताकि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।

गाँव-गाँव स्वास्थ्य शिविर: दूषित पानी से होने वाली बीमारियों पर फोकस

जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी अमरोहा को निर्देशित किया कि

  • गजरौला एवं प्रभावित गांवों में गाँव-गाँव स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएं,
  • जल प्रदूषण से होने वाली पेट, त्वचा व अन्य बीमारियों की स्क्रीनिंग व उपचार किया जाए।

यह निर्णय प्रशासन की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें जनस्वास्थ्य को केंद्र में रखकर नीति निर्माण किया जा रहा है।

उद्योगों पर सख्ती: सभी फैक्ट्रियों की CTP जांच अनिवार्य

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए गए कि

  • सभी औद्योगिक इकाइयों की CTP (कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट) की सघन जांच की जाए,
  • मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रशासन का साफ संदेश है कि औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरण से कोई समझौता नहीं होगा।

उथले हैंडपंप होंगे दुरुस्त, जल निगम को हर ब्लॉक में कार्रवाई के निर्देश

जल निगम (ग्रामीण) को निर्देशित किया गया है कि

  • सभी ब्लॉकों में उथले हैंडपंपों की मरम्मत और सुधार कराया जाए,
  • आमजन को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

डीएम का दो-टूक संदेश: कागज नहीं, जमीन पर दिखे काम

जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने स्पष्ट शब्दों में कहा—

“जल प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल कागजी योजनाओं से नहीं होगा। सभी विभाग समन्वय के साथ अभियान चलाएं और समयबद्ध, परिणामकारी कार्रवाई सुनिश्चित करें।”

स्थानीय फोकस: गजरौला के गांवों की वर्षों पुरानी पीड़ा

गजरौला और उसके आसपास के गांव—इब्राहिमपुर, सलेमपुर, शाहपुर, चकनवाला सहित औद्योगिक क्षेत्र से सटे इलाके—लंबे समय से दूषित जल की शिकायत कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई क्षेत्रों में हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियाँ बढ़ी हैं।

किसान संगठनों और स्थानीय नागरिकों की लगातार मांग के बाद अब प्रशासन की इस सक्रियता से लोगों में नई उम्मीद जगी है।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—

  •  उमेश चंद्र शुक्ल (क्षेत्रीय अधिकारी, उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड)
  •  शैलेंद्र सिंह (उपायुक्त उद्योग)
  • डॉ. योगेन्द्र सिंह (मुख्य चिकित्साधिकारी)
  • अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण)
  • कृषि विभाग के अधिकारी एवं प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि

अमरोहा के लिए बन सकता है जल प्रदूषण नियंत्रण मॉडल

यदि प्रशासन द्वारा घोषित यह समन्वित विशेष अभियान ईमानदारी और सख्ती से लागू हुआ, तो गजरौला ही नहीं बल्कि पूरा अमरोहा जनपद जल प्रदूषण नियंत्रण का मॉडल बन सकता है।
स्वच्छ जल, सुरक्षित खेती और बेहतर स्वास्थ्य—तीनों दिशाओं में यह पहल भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

 

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