बीमारों की मौत पर बीमा लूट! बिजनौर में पति-पत्नी चला रहे थे खौफनाक इंश्योरेंस गैंग, पुलिस ने किया बड़ा खुलासा
आशा नेटवर्क से बीमारों की पहचान, कूटरचित दस्तावेजों से HDFC लाइफ में बीमा और फिर बैंक-सिम-कोर्ट के जाल से बीमा राशि पर डाका—सिस्टम को चकमा देने वाला संगठित मॉडल बेनकाब
विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट | बिजनौर
बिजनौर में सामने आया फर्जी बीमा घोटाला सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि इंसानियत को शर्मसार करने वाला संगठित षड्यंत्र है। शहर कोतवाली पुलिस ने बीमार और मृत्युशय्या पर पहुंचे लोगों के नाम पर बीमा कराकर लाखों-करोड़ों की रकम हड़पने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए इसके सरगना नवाब अली और उसकी पत्नी रुखशी अंजुम को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस जांच में उजागर हुआ है कि यह गिरोह बीमा, बैंकिंग, सिम कार्ड और न्यायिक प्रक्रिया—चारों व्यवस्थाओं की खामियों का फायदा उठाकर लंबे समय से फर्जीवाड़ा कर रहा था।
शिकायतों से खुला राज, कई पीड़ित सामने आए
एसपी सिटी के अनुसार फूलवती पत्नी चंद्रहास, मोनू पुत्र तेजराम, निक्की सावन पुत्र बिजेंद्र और महिपाल पुत्र जबर सिंह सहित कई लोगों ने पुलिस को बताया कि उनके गंभीर रूप से बीमार परिजनों के नाम पर कूटरचित दस्तावेजों से बीमा कराया गया और बीमा की पूरी रकम गिरोह के लोगों ने हड़प ली।
लगातार बढ़ती शिकायतों ने पुलिस को पूरे नेटवर्क की परतें खोलने पर मजबूर कर दिया।
फर्जी बीमा का खौफनाक खेल: ऐसे चलता था पूरा नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया कि नवाब अली अपनी पत्नी रुखशी अंजुम, शरद त्यागी, आशा तारावती, एक अन्य सहयोगी और एक अज्ञात वकील के साथ मिलकर सुनियोजित और प्रोफेशनल ढंग से अपराध को अंजाम दे रहा था।
गिरोह का ऑपरेशन मॉडल:
- गांवों में आशा कार्यकर्ताओं के जरिए गंभीर रूप से बीमार लोगों की तलाश
- मृत्यु की संभावना वाले मरीजों को कागजों में पूरी तरह स्वस्थ दिखाना
- फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और दस्तावेजों से ऑनलाइन बीमा पॉलिसी कराना
- बीमाधारक के नाम से नॉमिनी का बैंक खाता घर बैठे खुलवाना
- नकली दस्तावेजों से नया सिम कार्ड निकलवाकर खाते से लिंक करना
- बीमा राशि आते ही पूरा पैसा खुद निकालकर हड़प लेना
बीमा रद्द हुआ तो कोर्ट से भी वसूली
जांच में यह भी सामने आया कि यदि HDFC लाइफ इंश्योरेंस जैसी कंपनियां बीमा रद्द कर देती थीं, तो गिरोह का वकील फर्जी कागजात और झूठे दावे के साथ उपभोक्ता फोरम का सहारा लेता था। वहां से भी बीमा राशि वसूल कर ली जाती थी।
यह पहलू इस केस को सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि न्यायिक प्रणाली के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण बनाता है।
पुलिस कार्रवाई और आगे का एक्शन
फिलहाल पति-पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेजने की प्रक्रिया जारी है। अन्य नामजद आरोपियों और अज्ञात वकील की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह अन्य जिलों में भी इसी पैटर्न पर सक्रिय हो सकता है।
बैंक, बीमा कंपनियों और टेलीकॉम एजेंसियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
बड़े सवाल जो सिस्टम से जवाब मांगते हैं
इस फर्जी बीमा कांड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
- बीमा कंपनियों की डिजिटल वेरिफिकेशन प्रक्रिया कितनी सुरक्षित है?
- बैंक और सिम कार्ड जारी करने में KYC मानकों की निगरानी क्यों फेल हुई?
- आशा कार्यकर्ताओं और फील्ड नेटवर्क की जवाबदेही कैसे तय होगी?
अपराध से बड़ा सबक
बिजनौर का यह मामला बताता है कि जब लालच कानून, सिस्टम और संवेदनाओं पर भारी पड़ता है, तो अपराध व्यवस्थित उद्योग बन जाता है। पुलिस की यह कार्रवाई न सिर्फ पीड़ितों के लिए राहत है, बल्कि बीमा और बैंकिंग सिस्टम के लिए कड़ा चेतावनी संकेत भी है।












