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बूथों का बड़ा पुनर्गठन: बिजनौर में मतदेय स्थलों के सम्भाजन पर अहम बैठक, राजनीतिक दलों से मांगे सुझाव

बूथों का बड़ा पुनर्गठन: बिजनौर में मतदेय स्थलों के सम्भाजन पर अहम बैठक, राजनीतिक दलों से मांगे सुझाव

जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में निर्णय—1500 मतदाता प्रति बूथ नियम लागू करने की तैयारी तेज

बिजनौर, 14 नवम्बर 2025। निर्वाचन आयोग के नए दिशानिर्देशों के तहत बिजनौर में मतदेय स्थलों के सम्भाजन यानी बूथ पुनर्गठन की प्रक्रिया अब गति पकड़ रही है। इसी क्रम में जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में दोपहर 3 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें अधिकारियों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

मुख्य बिंदु: क्यों हो रहा है बूथों का नया सम्भाजन?

  • निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि एक बूथ पर 1500 से अधिक मतदाता नहीं होने चाहिए।
  • जिन बूथों पर यह संख्या अधिक है, वहां नया बूथ बनाया जाएगा या पास के बूथों का पुनर्गठन किया जाएगा।
  • बूथों के संयोजन/विभाजन में यह ध्यान रखा जाएगा कि
    • मतदाता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
    • घर से बूथ की दूरी तय मानक से अधिक न हो।
    • यदि किसी केन्द्र पर दो बूथ हैं तो 1500-1500 के संतुलन में बूथों को व्यवस्थित किया जाए।
    • जहां मतदाता संख्या कम है, वहां निकटवर्ती बूथों को जोड़ने पर भी विचार होगा।

जिलाधिकारी का स्पष्ट संदेश: पारदर्शिता और सुगमता ही प्राथमिकता

जिलाधिकारी जसजीत कौर ने बैठक में कहा कि बूथ सम्भाजन की पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक मतदाता को सहज मतदान अनुभव मिले।
उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने सुझाव, प्रस्ताव या आपत्तियां शीघ्रतापूर्वक जिला निर्वाचन कार्यालय में उपलब्ध कराएं, ताकि सभी बिंदुओं को समय रहते निर्वाचन आयोग तक भेजा जा सके।

राजनीतिक दलों की मौजूदगी—सामूहिक निर्णय की दिशा में कदम

बैठक में इन प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया—

  • अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वान्या सिंह
  • ज्वाइंट मजिस्ट्रेट स्मृति मिश्रा
  • समस्त उप जिलाधिकारी
  • सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी प्रमोद कुमार
  • भाजपा से धीर सिंह
  • बसपा से मुहम्मद सिद्दीक
  • सपा से अखलाक उर्फ पप्पू
  • अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि

उनकी मौजूदगी से यह साफ है कि प्रशासन बूथ सम्भाजन प्रक्रिया को सर्वसम्मत एवं पारदर्शी बनाने के प्रयास में है।

विश्लेषण: बूथ पुनर्गठन से क्या बदलेगा?

✔️ मतदाताओं का बोझ कम होगा

लंबी कतारें और भीड़ वाली व्यवस्था में कमी आएगी।

✔️ ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों को होगा लाभ

निर्धारित दूरी मानकों का पालन होने से वोटिंग तक पहुंच और आसान होगी।

✔️ राजनीतिक दलों की भूमिका अहम

विभिन्न दलों द्वारा दिए गए सुझाव कई बूथों की स्थिति बदल सकते हैं। इससे स्थानीय समीकरणों पर भी असर संभव है।

✔️ प्रशासनिक तैयारी को मजबूती

मतदान दिवस से पहले सभी बूथों की भौतिक स्थिति और व्यवस्थाओं का पुनर्मूल्यांकन होगा।

निष्कर्ष

बिजनौर में बूथ सम्भाजन की यह प्रक्रिया सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि मतदाता सुविधा और निर्वाचन पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के सुझावों और आयोग की स्वीकृति के बाद जिले में बूथों का नया नक्शा सामने आएगा।

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