कोटद्वार में मानवता का महादान: श्री सिद्धबली मंदिर समिति के रक्तदान शिविर में 109 लोगों ने किया जीवनदान
स्व. अखिल ध्यानी की स्मृति में आयोजित शिविर बना प्रेरणा का प्रतीक — विधायक दिलीप रावत बोले, “रक्तदान सबसे बड़ा धर्म, जीवन बचाने की सबसे सुंदर साधना”
कोटद्वार।
मानवता और सेवा का अनुपम उदाहरण पेश करते हुए कोटद्वार में श्री सिद्धबली मंदिर समिति द्वारा स्व. अखिल ध्यानी की स्मृति में एक भव्य रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में 125 लोगों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 109 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया।
यह आयोजन न केवल रक्त की कमी से जूझ रहे जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायिनी पहल साबित हुआ, बल्कि यह समाज में सेवा भावना और सामूहिक जिम्मेदारी की एक नई मिसाल भी बना।
शिविर में उमड़ी मानवता की भीड़
सुबह से ही श्री सिद्धबली मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। महिलाएं, युवा और वरिष्ठ नागरिक — सभी उत्साहपूर्वक रक्तदान के लिए पहुंचे। कई लोगों ने पहली बार रक्तदान किया और इसे जीवन का यादगार अनुभव बताया।
चिकित्सकों की टीम ने लोगों को रक्तदान के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि “एक यूनिट रक्त से तीन लोगों का जीवन बचाया जा सकता है”। शिविर में स्वच्छता, सुरक्षा और स्वास्थ्य जांच की पूरी व्यवस्था की गई थी।
16 सदस्यीय चिकित्सा दल की सक्रिय भागीदारी
रक्तदान शिविर में डा. उमेश सिंह, डा. एम.पी. श्रेष्ठ, गुलेल प्रसाद सहित 16 सदस्यीय चिकित्सा टीम ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं।
शिविर के दौरान सभी रक्तदाताओं की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें पौष्टिक पेय व प्रमाणपत्र दिए गए।
चिकित्सकों ने बताया कि नियमित रक्तदान से न केवल जरूरतमंदों को जीवन मिलता है, बल्कि रक्तदाता स्वयं भी शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है।
विधायक दिलीप रावत ने किया शिविर का उद्घाटन
लैंसडौन विधायक दिलीप रावत ने शिविर का शुभारंभ किया और रक्तदाताओं को प्रेरित किया। उन्होंने कहा—
“जीवन में रक्तदान ही सबसे बड़ा दान है। यह एक ऐसा पुण्य कार्य है जो किसी अनजान व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है। हमें अपने शुभ अवसरों — जैसे जन्मदिन, वर्षगांठ या किसी स्मरणीय दिवस — पर रक्तदान करने की आदत डालनी चाहिए।”
उन्होंने श्री सिद्धबली मंदिर समिति के इस सामाजिक कार्य की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक सोच और संवेदना को प्रोत्साहित करते हैं।
अखिल ध्यानी की स्मृति में प्रेरक पहल
इस रक्तदान शिविर को स्वर्गीय अखिल ध्यानी की पुण्य स्मृति को समर्पित किया गया। समिति के सदस्यों ने बताया कि अखिल ध्यानी सदैव समाजसेवा के लिए समर्पित रहे, और इस शिविर का उद्देश्य उनकी उसी भावना को जनसेवा में जीवंत रखना है।
शिविर में मौजूद रहे प्रमुख अतिथि और सामाजिक कार्यकर्ता
कार्यक्रम में मंदिर समिति अध्यक्ष डा. जे.पी. ध्यानी, सचिव शिव प्रसाद पोखरियाल, कोषाध्यक्ष ऋषभ भंडारी, ब्लॉक प्रमुख रणवीर सिंह सजवाण, पूर्व प्रमुख सुमन कोटनाला, विजया नंद पोखरियाल, अग्रज जुयाल, रविंद्र जजेडी, राजदीप महेश्वरी, सुनील गोयल, दलजीत सिंह, मंजू सिंह, गिरिराज सिंह रावत, उत्कर्ष नेगी, शिवम नेगी, प्रणीता कंडवाल, शंकर बहादुर, याशिका जखवाल और कविता रावत सहित अनेक समाजसेवी एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
सभी ने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया और आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की।
रक्तदान बना जन-आंदोलन का प्रतीक
शिविर के समापन पर समिति अध्यक्ष डा. जे.पी. ध्यानी ने कहा —
“रक्तदान केवल जरूरतमंद की मदद नहीं, बल्कि यह समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी और मानवता का दायित्व है। श्री सिद्धबली मंदिर समिति भविष्य में भी ऐसे आयोजन करती रहेगी।”
लोगों का जोश और सहभागिता देखकर स्पष्ट था कि रक्तदान अब एक जन-आंदोलन के रूप में विकसित हो रहा है।
शिविर के प्रमुख तथ्य एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| 📍 आयोजन स्थल | श्री सिद्धबली मंदिर परिसर, कोटद्वार |
| 🕊️ अवसर | स्व. अखिल ध्यानी की स्मृति |
| 👥 पंजीकृत प्रतिभागी | 125 व्यक्ति |
| ❤️ रक्तदान करने वाले | 109 व्यक्ति |
| 👨⚕️ चिकित्सा टीम | 16 सदस्यीय दल |
| 🗣️ मुख्य अतिथि | विधायक दिलीप रावत |
| 🪔 आयोजनकर्ता | श्री सिद्धबली मंदिर समिति |
“श्री सिद्धबली मंदिर परिसर में रक्तदान करते युवा — सेवा, समर्पण और संवेदना का जीवंत प्रतीक बना शिविर।”
✍️ विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह आयोजन
- उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में रक्त की उपलब्धता कई बार चुनौती बन जाती है।
- ऐसे आयोजनों से न केवल रक्त की कमी पूरी होती है, बल्कि समाज में सेवा, एकता और जीवनदायिनी सोच का प्रसार होता है।
- यह पहल दर्शाती है कि मंदिर समितियाँ अब सिर्फ धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का केंद्र बन रही हैं।
कोटद्वार में आयोजित यह रक्तदान शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव था।
स्व. अखिल ध्यानी की स्मृति में हुई इस पहल ने यह संदेश दिया कि —
“जीवन का असली अर्थ है — किसी और के जीवन में रोशनी बनना।”














