नहटौर थाने पर किसानों का हल्ला-बोल: चोरी की बाइक बरामद न होने और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर धरना प्रदर्शन

मुख्य बिंदु (Highlights)
- चोरी हुई मोटरसाइकिल बरामद न होने पर किसानों का गुस्सा फूटा
- थाने में भ्रष्टाचार और दरोगा जितेंद्र तोमर पर गंभीर आरोप
- मृत व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई बनी विवाद का बड़ा मुद्दा
- किसान यूनियन ने 10 दिन की चेतावनी के बावजूद कार्रवाई न होने पर किया धरना
- ब्लॉक अध्यक्ष मुनेश अहलावत के नेतृत्व में सैकड़ों किसान पहुंचे थाने
खबर विस्तार से
नहटौर थाना प्रांगण, बिजनौर में आज (21 सितंबर 2025) किसानों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। मामला एक किसान की चोरी हुई मोटरसाइकिल से जुड़ा है, जिसे कई दिनों बाद भी पुलिस बरामद नहीं कर सकी। किसान यूनियन ने 9 तारीख को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन समयसीमा बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा।
किसानों ने थाने के अंदर बैठकर भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनुचित व्यवहार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने खास तौर पर दरोगा जितेंद्र तोमर पर गंभीर आरोप लगाए कि उन्होंने ग्राम फूलसनधि के एक कई साल पहले मर चुके व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज कर दिया, जिससे थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदर्शन में प्रमुख किसान नेता
इस धरने की अध्यक्षता ब्लॉक अध्यक्ष मुनेश अहलावत ने की। उनके साथ कई वरिष्ठ किसान नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- पूर्व तहसील अध्यक्ष राजेंद्र सिंह,
- तहसील अध्यक्ष कविराज सिंह,
- नरदेव सिंह, जगत सिंह, धीरेंद्र चौधरी, विशाल डवास, अतेंद्र चौधरी,
- शुभम अहलावत, पुनीत तुसयार, रोहित राणा, रिंकू राठी,
- राजवीर सिंह, लोकेंद्र चौधरी, वरुण चिकारा, अरुण अहलावत,
- शेखर चौधरी, दिनेश ठाकुर, संजीव चौधरी, कुलदीप चौधरी, आदित्य चौधरी, रितेंद्र चौधरी समेत कई किसान।
किसानों की मांगें
- चोरी हुई बाइक की तत्काल बरामदगी।
- दरोगा जितेंद्र तोमर पर कार्रवाई और “मृतक पर मुकदमा दर्ज करने” जैसे मामलों की जांच।
- थाने में फैले भ्रष्टाचार और किसानों के साथ अनुचित व्यवहार को बंद कराया जाए।
- पुलिस की कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही लाई जाए।
विश्लेषण
यह प्रदर्शन न सिर्फ एक किसान की चोरी हुई मोटरसाइकिल की बरामदगी का मामला है, बल्कि यह पुलिस की कार्यप्रणाली, भ्रष्टाचार और संवेदनशीलता की कमी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। मृत व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज करने जैसी घटना से कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर किसानों का भरोसा डगमगाता दिखाई दे रहा है।
किसानों का यह गुस्सा संकेत देता है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
👉 क्या नहटौर पुलिस किसानों की मांगों को गंभीरता से लेगी या यह मामला और बड़ा विवाद बनेगा?











