अवैध संबंध के शक में पति ने पत्नी को गंजा कर बेरहमी से पीटा, जलाने की कोशिश
सवालों के घेरे में कानून और समाज

बिजनौर, उत्तर प्रदेश। नगीना देहात क्षेत्र से सामने आया यह मामला सिर्फ घरेलू हिंसा का नहीं, बल्कि समाज और कानून दोनों की गंभीर खामियों को उजागर करता है। पति ने पत्नी पर अवैध संबंधों का शक करते हुए उसके साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। पीड़िता को न केवल बेरहमी से पीटा गया बल्कि उस्तरे से उसका सिर गंजा कर दिया गया और पेट्रोल छिड़ककर जलाने की कोशिश भी की गई।
घटनाक्रम विस्तार से
- झगड़े की जड़:
पति को लंबे समय से पत्नी पर शक था। यही शक बार-बार विवाद की वजह बनता था। - हिंसा का भयावह रूप:
घटना वाले दिन बहस बढ़ी तो आरोपी ने पहले पत्नी को पीटा, फिर उस्तरे से उसके सिर के बाल काट दिए। समाज में यह महिला के लिए न केवल शारीरिक चोट, बल्कि सार्वजनिक अपमान का भी प्रतीक है। - जलाने की कोशिश:
आरोपी ने पेट्रोल डालकर पत्नी को आग लगाने की कोशिश की, लेकिन शोर सुनकर पड़ोसी और परिजन पहुंचे और महिला की जान बच गई। - पुलिस की त्वरित कार्रवाई:
शिकायत दर्ज होते ही पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया। मामला धारा 323, 504, 506 और घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों में दर्ज किया गया। - पत्नी का पलटवार:
पुलिस कार्रवाई के कुछ ही समय बाद महिला ने अपने पति को बचाने की गुहार लगाई। उसने परिवार बचाने का हवाला देते हुए आगे की कार्यवाही से पीछे हटने की बात कही। - जमानत पर रिहाई:
अदालत ने आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया। इसने पूरे क्षेत्र में बहस छेड़ दी है।
कानूनी परिप्रेक्ष्य
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भारतीय दंड संहिता (IPC):
- धारा 323 — मारपीट
- धारा 504 — अपमान/उकसाना
- धारा 506 — जान से मारने की धमकी
- धारा 498A — पत्नी पर क्रूरता
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घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005:इसमें पीड़िता को तत्काल सुरक्षा, आश्रय और आर्थिक सहायता का अधिकार दिया गया है।
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आग लगाने की कोशिश: यह धारा 307 (हत्या का प्रयास) के अंतर्गत आ सकता है, जिसकी सजा दस साल से उम्रकैद तक हो सकती है।
महिला सुरक्षा से जुड़े आंकड़े
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) 2023 के अनुसार:
- भारत में हर घंटे लगभग 19 महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं।
- धारा 498A (पति या ससुराल पक्ष द्वारा क्रूरता) के अंतर्गत सालाना एक लाख से अधिक मामले दर्ज होते हैं।
- उत्तर प्रदेश घरेलू हिंसा के मामलों में शीर्ष राज्यों में गिना जाता है।
विशेषज्ञों और संगठनों की राय
- कानून विशेषज्ञ:
इतने गंभीर अपराध के बावजूद आरोपी को जमानत मिलना न्याय व्यवस्था की कमजोरी को दिखाता है। ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर अदालतों को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।- महिला संगठनों का कहना:
अक्सर महिलाएं सामाजिक दबाव, आर्थिक निर्भरता और परिवार टूटने के डर से अपने बयान बदल देती हैं। सरकार को पीड़िताओं के लिए आश्रय गृह, कानूनी सहयोग और काउंसलिंग की व्यवस्था और मजबूत करनी चाहिए।- सामाजिक कार्यकर्ता:
घरेलू हिंसा को ‘निजी मामला’ मानना गलत है। यह अपराध है और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है कि पीड़िताओं को न्याय दिलाया जाए।
बड़ा सवाल
- जब आरोपी ने पत्नी को जलाने की कोशिश की, तो उसे इतनी आसानी से जमानत क्यों मिली?
- क्या कानून को और सख्त बनाने की जरूरत है ताकि पीड़िता के बयान बदलने पर भी आरोपी सजा से न बच सके?
- क्या समाज महिलाओं को घरेलू हिंसा से लड़ने के लिए पर्याप्त समर्थन देता है?
बिजनौर का यह मामला सिर्फ एक महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनहीनता और कानून की कमजोरी का आईना है। आरोपी की जमानत पर रिहाई यह सवाल छोड़ जाती है कि क्या महिलाएं अपने ही घरों में सुरक्षित हैं? और क्या कानून महिलाओं की रक्षा करने के लिए पर्याप्त मजबूत है?
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि घरेलू हिंसा सिर्फ परिवार का मामला नहीं, बल्कि समाज और न्याय-व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती है।











