बिजनौर में स्वास्थ्य विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप: झोलाछाप डॉक्टरों से अवैध वसूली का गोरखधंधा उजागर

बिजनौर: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर एक गंभीर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। हाल ही में वायरल हुई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग ने इस बात का खुलासा किया है कि बिजनौर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के कार्यकाल में झोलाछाप डॉक्टरों से अवैध वसूली का संगठित खेल खेला जा रहा था। इस मामले में ACMO (अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी) डॉक्टर राजेंद्र सिंह विश्वकर्मा और उनके सरकारी चालक मनवीर सिंह का नाम प्रमुखता से सामने आया है।
ऑडियो वायरल होने से खुली पोल
सूत्रों के अनुसार, ACMO के सरकारी चालक मनवीर सिंह की एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें वह अवैध वसूली की बात करता हुआ सुनाई दे रहा है। आरोप है कि यह वसूली ACMO डॉक्टर राजेंद्र सिंह विश्वकर्मा के इशारे पर की जा रही थी। जिले भर के झोलाछाप डॉक्टरों से भारी रकम लेकर उन्हें बिना किसी कार्रवाई के खुला छोड़ा जा रहा था, जिससे स्वास्थ्य विभाग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी या मिलीभगत?
बिजनौर में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है, जो बिना किसी मान्यता के लोगों का इलाज कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को इन्हें रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन इसके विपरीत, अब यह सामने आ रहा है कि विभाग के ही अधिकारी इनसे अवैध वसूली कर रहे हैं और उन्हें संरक्षित कर रहे हैं। इस तरह की गतिविधियों से न केवल मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य प्रशासन की साख भी दांव पर लग गई है।
CMO कौशलेन्द्र की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कौशलेन्द्र की चुप्पी भी संदेहास्पद बनी हुई है। जब मीडिया ने इस भ्रष्टाचार पर उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी और खुद को बचाते नजर आए। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि कहीं न कहीं पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं।
प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत
यह मामला उजागर होने के बाद जनता और जागरूक संगठनों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। यदि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारना है, तो भ्रष्टाचार के इस जाल को तोड़ना होगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी होगी। झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के साथ-साथ उन अधिकारियों पर भी शिकंजा कसना जरूरी है, जो इस अवैध गतिविधि को बढ़ावा दे रहे हैं।
बिजनौर में स्वास्थ्य विभाग की यह भ्रष्टाचार भरी सच्चाई सिर्फ एक जिले की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक बड़े तंत्र की ओर इशारा करती है, जहां नियमों को ताक पर रखकर अवैध वसूली की जा रही है। यदि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं लेता, तो यह जनता की सेहत और चिकित्सा व्यवस्था दोनों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।












