मनरेगा बचाओ संग्राम में बिजनौर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन: विधान सभा घेराव में सैकड़ों कार्यकर्ता गिरफ्तार, 2027 चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश
विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट। अवनीश त्यागी
लखनऊ/बिजनौर, 17 फरवरी 2026। मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में लखनऊ में आयोजित विधानसभा घेराव कार्यक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नया संदेश दे दिया। इस बड़े आंदोलन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बिजनौर जिला इकाई की मजबूत और आक्रामक उपस्थिति विशेष चर्चा का केंद्र रही।
जिलाध्यक्ष हेनरीता राजीव सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने लखनऊ पहुंचकर न केवल घेराव में भाग लिया, बल्कि गिरफ्तारी देकर संगठन की सक्रियता का प्रदर्शन भी किया।
आंदोलन में बिजनौर कांग्रेस की ‘निर्णायक’ भागीदारी
मनरेगा बचाओ संग्राम को लेकर प्रदेशभर से कांग्रेस कार्यकर्ता लखनऊ पहुंचे थे, लेकिन बिजनौर जिला कांग्रेस की भागीदारी को विशेष रूप से प्रभावशाली माना जा रहा है।
जिलाध्यक्ष हेनरीता राजीव सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। यह भागीदारी कांग्रेस के ग्रामीण मुद्दों, विशेषकर गरीब और मजदूर वर्ग के रोजगार से जुड़े अधिकारों को लेकर पार्टी की गंभीरता को दर्शाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक ताकत का संकेत देने की कोशिश की है।
गिरफ्तारी देकर दिया संघर्ष का संदेश
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार होने वालों में प्रमुख रूप से—
- जिलाध्यक्ष हेनरीता राजीव सिंह
- ओमवती देवी (पूर्व सांसद)
- आर.के. सिंह (सेवानिवृत्त IAS)
- हुमायूं बैग (शहर अध्यक्ष)
- जावेद अंसारी (जिला उपाध्यक्ष संगठन)
- जहांगरी जैदी (नगर अध्यक्ष)
- जफर मलिक (जिला उपाध्यक्ष)
- अनिल त्यागी (कार्यालय प्रभारी)
- हरिराज सिंह, अजीम अंसारी, अहसन जमील, जसराम सिंह सहित
- सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल रहे।
गिरफ्तारी देकर कांग्रेस नेताओं ने सरकार के खिलाफ अपने विरोध को खुलकर दर्ज कराया।
“2027 में जनता देगी जवाब”— जिलाध्यक्ष का बड़ा बयान
जिलाध्यक्ष हेनरीता राजीव सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में केंद्र और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा—
“सरकार गरीबों का हक छीनकर अमीरों को फायदा पहुंचा रही है। कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ सड़क से लेकर विधानसभा तक संघर्ष करेगी और 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिजनौर कांग्रेस मनरेगा की रक्षा के लिए हर स्तर पर आंदोलन जारी रखेगी।
राजनीतिक मायने: पश्चिम यूपी में कांग्रेस की सक्रियता बढ़ाने की रणनीति
यह आंदोलन केवल मनरेगा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके जरिए कांग्रेस ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने का अभियान शुरू कर दिया है।
राजनीतिक महत्व के प्रमुख संकेत:
- ✔ पश्चिमी यूपी में संगठन को मजबूत करने का प्रयास
- ✔ ग्रामीण और मजदूर वोट बैंक पर फोकस
- ✔ सरकार के खिलाफ जन आंदोलन की रणनीति
- ✔ चुनावी वर्ष से पहले कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरना
विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस अब सड़क पर संघर्ष के जरिए राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
क्या है मनरेगा और क्यों बना राजनीतिक मुद्दा
मनरेगा देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है।
विपक्ष का आरोप है कि बजट और कार्य दिवस कम होने से मजदूर प्रभावित हो रहे हैं, जबकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है।
निष्कर्ष: बिजनौर से निकला राजनीतिक संदेश
लखनऊ में हुए इस विधानसभा घेराव ने साफ कर दिया है कि बिजनौर कांग्रेस अब आक्रामक भूमिका में है।
सैकड़ों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और जिलाध्यक्ष के सख्त बयान से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले चुनाव से पहले कांग्रेस जन आंदोलनों के जरिए अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
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