सैदपुर भट्टा में 21 फरवरी को ‘किसान शक्ति संग्राम’! मुरादाबाद-अमरोहा-बिजनौर की संयुक्त महापंचायत से गरजेगा पश्चिम यूपी
बिजनौर | अवनीश त्यागी की ग्राउंड रिपोर्ट | किसान राजनीति स्पेशल
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। 21 फरवरी को नूरपुर–छजलैट रोड स्थित ग्राम सैदपुर भट्टा में मुरादाबाद, अमरोहा और बिजनौर की संयुक्त महापंचायत आयोजित होने जा रही है। इसे क्षेत्रीय स्तर पर किसानों के सबसे बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
महापंचायत की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए बिजनौर स्थित सम्राट बैंक्वेट हॉल में आयोजित समीक्षा बैठक में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने व्यापक रणनीति पर चर्चा की और इसे ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया।
रणनीति, संख्या और संदेश: समीक्षा बैठक में क्या तय हुआ?
बैठक की अध्यक्षता चौधरी सुनील प्रधान ने की, जबकि संचालन मुकेश कुमार (जंघाला) ने किया। प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी सत्यवीर सिंह और प्रदेश महासचिव चौधरी कुलदीप सिंह की मौजूदगी ने बैठक को संगठनात्मक रूप से अहम बना दिया।
बैठक में तीन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी:
- तीनों जनपदों से अधिकतम किसान भागीदारी सुनिश्चित करना
- ग्राम स्तर तक संपर्क अभियान चलाना
- स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों को साझा मंच से उठाना
पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सभा नहीं, बल्कि किसानों की एकजुटता का सामूहिक प्रदर्शन होगा।
संगठन को मिला बल: नए चेहरे, नई ऊर्जा
समीक्षा बैठक के दौरान बिजनौर के वरिष्ठ पदाधिकारी गौरव कुमार (जंघाला) और नीटू चौधरी ने अपने समर्थकों के साथ भारतीय किसान यूनियन की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और प्रमुख किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत के नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभाने की घोषणा की।
नव-शामिल कार्यकर्ताओं में वीरेन्द्र सिंह, सतेंद्र सिंह, रोबिन सिंह, गुलाब, राहुल कुमार, अरविंद कुमार, विनीत तोमर, दुर्गेश कुमार, राकेश, उज्ज्वल, संजीव, दीपक समेत कई नाम प्रमुख रूप से शामिल रहे।
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के संगठन विस्तार से महापंचायत में भीड़ और प्रभाव दोनों बढ़ने की संभावना है।
क्यों अहम है सैदपुर भट्टा की महापंचायत?
पश्चिमी यूपी का क्षेत्र लंबे समय से किसान आंदोलनों की जमीन रहा है। ऐसे में तीन जिलों की संयुक्त महापंचायत कई स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है:
1️⃣ क्षेत्रीय मुद्दों का सामूहिक मंच
गन्ना भुगतान, बिजली दरें, सिंचाई, एमएसपी और प्रशासनिक समस्याओं जैसे मुद्दों को एक साथ उठाने की तैयारी है।
2️⃣ राजनीतिक संदेश
महापंचायत को किसान एकता और संगठन की ताकत के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जिसका प्रभाव आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
3️⃣ संगठनात्मक मजबूती
तीनों जिलों की इकाइयों का संयुक्त मंच भविष्य में बड़े आंदोलनों की पृष्ठभूमि तैयार कर सकता है।
ग्राउंड मैसेज: “एकता से ही बदलाव”
बैठक के अंत में वक्ताओं ने कहा कि 21 फरवरी की महापंचायत किसानों की आवाज को नई धार देगी और क्षेत्रीय समस्याओं को सशक्त मंच प्रदान करेगी। आयोजन को सफल बनाने में नरेन्द्र सिंह, जितेंद्र सिंह, भोपाल सिंह और अरुण कुमार सहित अन्य पदाधिकारियों का विशेष योगदान बताया गया।
21 फरवरी पर टिकी नजरें
अब सबकी निगाहें सैदपुर भट्टा पर हैं। क्या यह महापंचायत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन की नई लहर का संकेत बनेगी? क्या तीन जिलों की यह एकजुटता बड़े स्तर के संघर्ष की भूमिका तैयार करेगी?
एक बात साफ है—21 फरवरी को सैदपुर भट्टा सिर्फ एक गांव नहीं रहेगा, बल्कि किसान एकता के केंद्र में होगा।











